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विधायकों की खरीद-फरोख्त के मामले में एसीबी द्वारा एफआर लगाने पर हाईकोर्ट ने भरत मालानी व अशोक सिंह को राहत देते हुए उन पर चल रहे केस को बंद कर दिया है। जस्टिस आशुतोष कुमार की एकलपीठ ने कहा कि जब एसीबी ने ही प्रकरण में अपराध बनना प्रमाणित नहीं माना तो
याचिकाकर्ताओं ने पांच साल पहले याचिका दायर करके एसीबी की ओर से दर्ज एफआईआर को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वीआर बाजवा और अधिवक्ता पंकज गुप्ता का कहना था कि प्रकरण में पहले एसओजी में राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया और फिर उसमें एफआर लगाते हुए प्रकरण को एसीबी में भेज दिया गया।
फोन रिकॉर्डिंग के आधार पर मामला दर्ज हुआ उन्होंने बताया कि पूरा प्रकरण फोन रिकॉर्डिंग के आधार पर दर्ज किया गया था। जबकि याचिकाकर्ताओं की रिकॉर्डिंग से साफ है कि सभी लोग आपस में सामान्य गपशप कर रहे थे। विधायकों की खरीद-फरोख्त करने जैसी कोई बात नहीं थी। अब एसीबी ने अदालत में एफआर पेश कर दी हैं, इसलिए मामले को निस्तारित किया जाए।
चुनी हुई सरकार को गिराने का लगा था आरोप दरअसल, एसीबी ने याचिकाकर्ताओं और अन्य लोगों पर चुने हुए विधायकों को रुपए का लालच देकर लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया था। इन पर आरोपों पर था कि इन्होने विधायकों को अपने मत का प्रयोग रुपए देकर अनुचित तरीके से प्रभावित करने का आपराधिक कृत्य किया।
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