लंदन में रहने वाली बीकानेर निवासी कल्पना थानवी ने तंजानिया के माउंट किलिमंजारो की चढ़ाई सफलता पूर्वक पूरी कर ली है। कल्पना ने पिछले दिनों इस यात्रा को पूरा किया। एवरेस्ट की तरह ये पर्वतीय चोटी भी दुनिया की प्रमुख पर्वत शृंखला में शामिल है। प्राकृतिक

पर्वत शृंखला पर चढ़ते वक्त रास्ते में कल्पना थानवी।
ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरुकता का उद्देश्य
दैनिक भास्कर से बातचीत में कल्पना ने बताया कि वो ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरुकता फैला रही एक संस्थान की फंडिंग में शामिल होना चाहती थी। इसी कैंपेन के माध्यम से संस्थान को फंडिंग होनी थी। ऐसे में उसका हिस्सा बनकर सुखद अहसास हो रहा है।
बर्फ से अटी है ये पर्वत शृंखला
कल्पना बताती हैं कि ये पर्वत शृंखला बर्फ से ढकी हुई है। ऐसे में ऊंचाई तक चढ़ना आसान नहीं था। दल में प्रशिक्षित टीम के सदस्य थे और उन्होंने पूरा सहयोग किया। सुंदर और आकर्षक इस रास्ते का लुत्फ भी उठाया तो जोखिम भी कम नहीं था। इसके बाद भी उन्होंने मंजिल तक पहुंचकर ही दम लिया।

माउंट किलिमंजारों पर कल्पना थानवी।
6 अगस्त को शुरू की थी चढ़ाई
अफ्रीका की सबसे ऊंची पर्वत शृंखला किलिमंजारो पर चढ़ाई का सिलसिला 6 अगस्त काे शुरू किया और पंद्रह अगस्त तक चला। तंजानिया में स्थित ये पर्वत शृंखला करीब 5 हजार 895 मीटर यानी 19 हजार 341 फीट ऊंची है।
ऊंचाई 19 हजार 341 फीट
इस पर्वत शृंखला पर चढ़ना काफी मुश्किल है। ये अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी है और इसे पार करना बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। तंजानिया में स्थित ये पर्वत शृंखला ज्वालामुखी से बनी है। इनका नाम किबो, मवेन्जी, और शिरा है, जिसमें किबो सबसे ऊंची चोटी है, जिसे उहुरू शिखर के नाम से भी जाना जाता है। इसी की ऊंचाई 19 हजार 341 फीट है।

कल्पना को माउंटेन क्लाइंम्बिंग सर्टिफिकेट भी मिला।
लंदन में रहती हैं कल्पना
मूल रूप से बीकानेर के जोशीवाड़ा क्षेत्र में रहने वाली कल्पना लंदन में ही काम करती है। उनके पति लंदन के प्रसिद्ध ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नरोत्तम थानवी भी प्रोत्साहित करते हैं। डॉ नरोत्तम राजस्थान के फलोदी के निवासी हैं। विवाह के बाद भी उनका पर्वतारोहण से प्रेम कम नहीं हुआ। बार-बार प्रयास करने के बाद अब इस पर्वत श्रृंखला पर चढ़ने में सफलता मिल गई है।
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