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नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित साउथ एशियन मेनूस्क्रिप्ट्स हेरिटेज एंड मैथमेटिकल कंट्रीब्यूशन प्रदर्शनी में बीकानेर के राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में संग्रहीत पांडुलिपियों का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने किया। प्रदर्शनी में राजस्थान सहित महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, जम्मू कश्मीर के अलावा तुर्की, ईरान, अमेरिका, फ्रांस और नेपाल से आई पांडुलिपियों का भी प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी का आयोजन संहिता समहिता संस्थान, विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया गया। भारतीय गणित ने कला, निर्माण, ज्योतिष, अंतरिक्ष विज्ञान को किस प्रकार लाभान्वित किया, इसका प्रदर्शन भी किया गया। व्यापार, प्रशासन, अर्थव् यवस्था में गणितज्ञ सिद्धांतों के प्रयोग के बारे में भी बताया गया।
प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर प्रिंसटन विश्वव द्यालय अमेरिका के प्रोफेसर पद्म विभूषण मंजुल भार्गवा ने विश्व गणित में भारत के योगदान विषय पर उद्बोधन से दिया। प्रदर्शनी में राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन की प्रथम निदेशक प्रोफेसर सुधा गोपाल ृष्ण, पूर्व भारतीय भारतीय राजदूत श्री श्याम शरण भी उपस्थित रहे। इस दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा संस्थान आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रोफेसर के सुब्रमण्यम ने विचार रखे। डॉ. नितिन गोयल ने बताया कि संस्थान में संधारित पांडुलिपियों का राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन 21वीं शताब्दी में पहली बार हुआ है, जो कि बीकानेर के लिए बड़ी उपलब्धि है। राजनीतिक कूटनीति के साथ सांस्कृतिक कूटनीति महत्वपूर्ण कार्यक्रम में विदेश मंत्री ने कहा कि राजनीतिक कूटनीति के साथ सांस्कृतिक कूटनीति भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत में संकलित विभिन्न पांडुलिपियां श्रीलंका, नेपाल, इंडोनेशिया, बाली, मालदीव्स, जापान और नेपाल जैसे देशों में भी गई हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में भारतीय गणित की प्रतिष्ठा भी महत्वपूर्ण है। इसकी पुष्टि शताब्दियों पुरानी पांडुलिपियों से स्वयं सिद्ध होती हैं। प्रदर्शित प्रतिष्ठान के अधिकारी डॉ. नितिन गोयल ने बताया कि राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में संधारित पांडुलिपियों में गणित सार, करण कटोल, खंड खाद्य, लीलावती, सिद्धांत शिरोमणि, ताजिक तंत्र, ताजिक टीका रसाल, गृह लाघव आदि का प्रदर्शन किया गया। इन पांडुलिपियों में गणितीय परंपरा के तहत अंक, ज्यामिति, त्रिकोणमिति, डिसमिल, कैलकुलस में गणित-संगीत और निर्माण कार्यों में अंदर गणितज्ञ विद्या के उपयोग को बताया गया है।
भारतीय गणित विज्ञान का गत शताब्दियों से अरब देशों के साथ व्यवहार एवं संस्कृत विद्वानों द्वारा अरब गणित के प्रभाव को दर्शाया गया। लीलावती, गणितसार, समग्रज्ञान सूत्रधार, बक्सली, सिद्धांत सिद्धू का प्रदर्शन किया गया। भारतीय गणित के विकास की ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाया गया।
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