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बाड़मेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने संसद में बालोतरा जिले में आ रहे प्रदूषित पानी का मुद्दा एक बार फिर उठाया। उन्होंने कहा कि जोधपुर, पाली, बालोतरा की अवैध और नियमों का उल्लंघन कर रही फैक्ट्रियों से निकल रहा जहरीला पानी तबाही के रूप में मरूगंगा लूणी न

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जोधपुर और बालोतरा जिले के दर्जनों गांव के हजारों ग्रामीणों का जीना दुश्वार हो गया है। बेनीवाल ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन कह रहा है गांव खाली करो। प्रदूषित पानी का संकट प्राकृतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार, लापरवाही और विफलता और भ्रष्टाचार का नतीजा है। जिसका शिकार हजारों ग्रामीण और मरुगंगा लूणी जैसी नदियों बन रही है।

दरअसल, जोधपुर और पाली के आसपास लगी फैक्ट्रियों से रसायनिक युक्त पानी बरसाती पानी के साथ छोड़ा जा रहा है। इससे यह पानी करीब 60 किलोमीटर बहकर बालोतरा जिले के डोली, अराबा, कल्याणपुर सहित आसपास के गांवों तक पहुंच चुका है। खेत, स्कूल व घरों में दो-तीन फुट पानी भरा हुआ है। अराबा पुरोहितान् गांव की आबादी को खाली करने की सूचना भी जारी की गई थी।

गांव में भरा प्रदूषित पानी।

गांव में भरा प्रदूषित पानी।

घरों, स्कूलों, तालाबों और श्मशानों में भरा प्रदूषित युक्त पानी, कोई कार्रवाई नहीं

सांसद ने संसद में बोलते हुए कहा- संसद का ध्यान जोधपुर, बालोतरा और पाली में संचालित हो रही अवैध और नियमों के विरूद्ध चल रही फैक्ट्रियों की ओर दिलाना चाहता हूं। जो प्रदूषित युक्त पानी बिना ट्रिटमेंट किए हुए जोजरी और लूणी नदी के अंदर डाल देते है। वहां पर लगे ट्रीटमेंट प्लांट उपयोग में नहीं ले रहे है। खंडर और जर्जर हो चुके है। इसकी वजह से आसपास के इलाके में गंदा प्रदूषित युक्त रसायनिक पानी भर गया है। कल्याणपुर के आसपास के गांव डोली, अराबा गांव प्रदूषित पानी, घरों, तालाबों, स्कूलों और श्मशानों के अंदर भर गया है। इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। उसके समाधान के लिए उपयुक्त कार्रवाई नहीं हो रही है।

पुराने ट्रीटमेंट प्लांट सही करवाने के साथ नए प्लांट लगाने की मांग

सरकार से मेरी मांग है कि पॉल्युशन विभाग को सख्त किया जाए वहां पर टीम भेजकर अवैध फैक्ट्रिया चल रही है। उनका निरीक्षण किया जाए। उन अवैध फैक्ट्रियों को बंद करवाया जाए। जो ट्रीटमेंट प्लांट नहीं चल रहे उनको ठीक करवाने के साथ नए प्लांट लगाए जाए। ताकि भविष्य में इस समस्या का समाधान किया जा सके। पिछले मानसून सत्र में भी मैंने मांग की थी लेकिन पॉल्शुयन विभाग ने वहां टीम भेजकर खानापूर्ति करके चली गई। कोई कार्रवाई नहीं की है। यह समस्या साल-दर-साल चली आ रही है। समाधान के लिए कोई नीति बनाई जाए। है डबल जनहितैषी शासन?



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