जैसलमेर। कार्यवाहक जिलाध्यक्ष अमरदीन फकीर व जिलाध्यक्ष उम्मेद सिंह तंवर को जिलाध्यक्ष बनाने में जुटे दो गुट।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के सामने जैसलमेर में कांग्रेस की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई। संगठन सृजन कार्यक्रम के तहत आयोजित बैठक में कांग्रेस के दो गुट-फकीर और धणदे- ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया और जिल
बैठक में एआईसीसी के संयुक्त सचिव सुशांत मिश्रा और महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सारिका सिंह मौजूद थे। दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं ने अपने नेताओं के पक्ष में नारेबाजी करते हुए शक्ति प्रदर्शन किया। दोनों ही पक्ष अपने अपने गुट से जिलाध्यक्ष बनाने में लगे हैं।

बैठक में एआईसीसी के संयुक्त सचिव सुशांत मिश्रा और महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सारिका सिंह मौजूद थे।
फकीर गुट अल्पसंख्यक को तो धणदे गुट मूल OBC को बनाने के पक्ष में संगठन सृजन कार्यक्रम के तहत जिला अध्यक्षों का चुनाव होना है। इसके लिए पार्टी ने पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। पर्यवेक्षक तीन दिन तक जिले में रहकर कार्यकर्ताओं से वन-टू-वन बातचीत करेंगे। सभी रायों को संकलित कर प्रदेश नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बैठक में पूर्व प्रधान अमरदीन फकीर ने जिले से केवल एक नाम भेजने की बात कही, जबकि पूर्व विधायक रूपाराम धणदे ने यह मांग रखी कि मुस्लिम और मेघवाल वर्ग को छोड़कर “मूल ओबीसी” समाज से जिलाध्यक्ष चुना जाए। इस पर पूर्व जिला प्रमुख अब्दुला फकीर ने कहा कि कांग्रेस की परंपरागत वोट बैंक रहे अल्पसंख्यक समुदाय से ही जिलाध्यक्ष बनाया जाना चाहिए।
अन्य नेता एकजुट होकर निर्णय लेने के पक्ष में
स्थिति तब और जटिल हो गई जब कांग्रेस नेता जानब खान और नैनदान रतनू ने अपील की कि दोनों गुट आपसी मतभेद भूलकर पार्टी को मजबूत करने के लिए एकजुट होकर निर्णय लें।
इसी दौरान कांग्रेस कार्यालय पहुंचे पूर्व कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद, जिनका कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा, “वर्तमान जिलाध्यक्ष उम्मेद सिंह का चयन भी बिना रायशुमारी के हुआ था। अगर दोनों गुट एक नहीं हुए तो पार्टी को नुकसान होगा।”
पर्यवेक्षक आज जैसलमेर और शुक्रवार को पोकरण विधानसभा के कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। इस रायशुमारी के आधार पर ही रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश नेतृत्व को भेजी जाएगी।

सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, पूर्व केबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद भी पहुंचे कांग्रेस कार्यालय।
अंतर्विरोध से जूझ रही पार्टी
जिलाध्यक्ष पद के चयन को लेकर जैसलमेर कांग्रेस में मचे घमासान ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी स्थानीय स्तर पर गंभीर अंतर्विरोधों से जूझ रही है। अब सारी निगाहें पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और प्रदेश नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस आलाकमान जातीय संतुलन और गुटीय राजनीति के बीच किसके पक्ष में फैसला सुनाता है।
सारिका सिंह (महिला कांग्रेस) ने इस बात को स्वीकार किया है कि दो गुट की राजनीति हो रही है और उन्होंने बताया कि वे इसे एक पूरी कोशिश करेंगी।

कांग्रेस कार्यालय के बाहर जमा भीड़।
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