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रिश्वत केस में फंसे सहायक अभियंता (AEN) खुमाराम के दलाल कमल कुमार (प्राइवेट व्यक्ति) की जमानत याचिका सीकर की एसीबी कोर्ट ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने माना कि रिश्वत कांड में कमल कुमार की सक्रिय भूमिका थी और उसके कब्जे से रिश्वत की राशि बरामद हुई है। व
रिश्वत लेते पकड़ा गया था दलाल
जयपुर ग्रामीण एसीबी के एडिशनल एसपी सुनील सिहाग के अनुसार- परिवादी ने शिकायत दर्ज की थी कि सीकर के देवास गांव में सरकारी स्कूल में कमरों के निर्माण के लिए उसकी फर्म को 27 लाख रुपए की बकाया राशि पास करने के बदले AEN खुमाराम ने 60 हजार और AAO रामचंद्र ने 45 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के सत्यापन के बाद 13 अगस्त को एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई की। इस दौरान कमल कुमार को 60 हजार और AAO रामचंद्र को 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
AEN ने फोन पर दिए थे पैसे देने के निर्देश
कोर्ट में पेश की गई पत्रावली के अनुसार- परिवादी जब AEN खुमाराम को रिश्वत देने गया, तब खुमाराम ऑफिस में मौजूद नहीं था। फोन पर हुई बातचीत में खुमाराम ने पहले पैसे अमित नाम के व्यक्ति को देने को कहा, लेकिन अमित के उपलब्ध न होने पर उसने कमल कुमार को पैसे देने का निर्देश दिया। कमल कुमार से 60 हजार रुपए की रिश्वत राशि बरामद की गई। कोर्ट ने माना कि कमल कुमार, जो एक ई-मित्र सेंटर संचालक है और पढ़ा-लिखा व्यक्ति है उसे यह जानकारी थी कि राशि अवैध रूप से ली जा रही है।
विशिष्ट लोक अभियोजक ने कोर्ट में तर्क दिया कि कमल कुमार AEN खुमाराम का दलाल था और उसकी रिश्वत लेने में सक्रिय भूमिका थी। अभियोजन ने कहा कि प्रकरण में अभी जांच जारी है और जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है। पत्रावली का अवलोकन और दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद विशिष्ट न्यायाधीश अखिलेश कुमार ने जमानत याचिका खारिज कर दी। वहीं, एसीबी की कार्रवाई की भनक लगते ही AEN खुमाराम फरार हो गया। एसीबी की टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं।
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