योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा- मुसलमान अब टेक्निकल काम करने लग गए हैं। मुसलमान की मजदूरी अब 500 से 1 हजार रुपए हो गई है। एक सौ और एक हजार रुपए कमाने वाला हर मुसलमान उस मजदूरी से 6% हिस्सा पहले ही निकाल लेता है। वह कहता है कि इस पर मेरा अधिकार नहीं है।
बाबा रामदेव ने कहा- और हम लोग 1 प्रतिशत काटने पर भी कहते हैं महाराज हम तो पहले ही गरीब हैं। उन्होंने कहा- जो दान नहीं देते हैं वो गरीब के गरीब ही रहेंगे, शास्त्र में लिखा है। जो अमीर दान नहीं करते हैं वो गरीब होने वाले हैं। बाबा रामदेव ने सीकर के रैवासा धाम में चल रहे 9 दिवसीय ‘सियपिय मिलन महोत्सव’ में ये बात कही।

योग गुरु बाबा रामदेव के साथ रैवासा धाम के पीठाधीश्वर राजेंद्र दास देवाचार्य।
बाबा रामदेव ने रैवासा धाम के पीठाधीश्वर राजेंद्र दास देवाचार्य का हवाला देते हुए कहा-

जो कोई ब्राह्मण बीड़ी, सिगरेट, शराब पीता है। तो वह गांव का सूअर बनकर पैदा होता है। यह बात महाराज जी ने कह दी तो बखेड़ा नहीं हुआ। अगर हमारे जैसे कोई कह देते तो हमारे पुतले जल जाते।

मां एक-दो रुपए मंदिर में दान देने के लिए देती थी रामदेव ने कहा- मैंने बचपन में 500 रुपए के कभी दर्शन नहीं किए। हमें टॉफी खाने के लिए 10 पैसे मिला करते थे। दीपावली के त्योहार पर मां 2 रुपए दिया करती थी, जिससे मुर्गा छाप पटाखे लाकर फोड़ते थे। हम 2 रुपए में ही दीवाली मना लेते थे, लेकिन मंदिर में दान देने के लिए मेरी मां मुझे एक-दो रुपए देकर भेजती थी।
उन्होंने कहा- हमारे घर में खाने से पहले पहले, पहली रोटी गाय की बनती थी। हमें भले ही पैसे न मिले हो, लेकिन अच्छे संस्कार जरूर मिले हैं।
60 के बाद ठाठ से जीने का आनंद आता है बाबा रामदेव ने कहा- मेरी दिनचर्या सुबह 3 बजे शुरू होती है। फिर हम अपना व्यक्तिगत ध्यान शुरू करते हैं। हम सुबह खुद रनिंग करते हैं। साधु-संत, महात्मा को कम से कम 80 साल तक दौड़ते रहना चाहिए।
रामदेव ने कहा- जब मैं 100 साल का हो जाऊंगा तो समय आगे बढ़ाऊंगा। हम 60 के बाद अपने आप को बुजुर्ग मानने लग जाते हैं, लेकिन 60 के बाद तो ठाठ से जीने का आनंद आता है। बाबा रामदेव ने मंच पर मारवाड़ी में बातचीत की और श्रद्धालुओं को मारवाड़ी भजन भी सुनाए।
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भागवत बोले- भगवान से प्रार्थना है मेरा दिमाग ठीक रहे:विश्व में बड़ी ताकतों के बावजूद भारत अपनी जगह बना रहा है

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- अगर स्वतंत्रता के बाद का हमारा इतिहास देखें तो उसके आधार पर कोई यह तर्क नहीं कर सकता कि भारतवर्ष उठेगा। लेकिन भारत वर्ष उठ रहा है। विश्व में अपना स्थान बना रहा है। विश्व में बड़ी ताकत है, लेकिन उसके बावजूद भारत अपना स्थान बना रहा है। (पढ़ें पूरी खबर)
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