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प्रदेश में फर्जी दस्तावेज और डमी कैंडिडेट के सहारे सरकारी नौकरी प्राप्त करने का बड़ा मामला सामने आया है।। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर की जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्य के विभिन्न जिलों में कार्यरत 72 शिक्षकों के खिलाफ स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) म
राज्य सरकार ने पिछले वर्ष आदेश जारी कर सभी विभागों को निर्देशित किया था कि वे वर्ष 2019 से 2024 के बीच नियुक्त हुए कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता, आवेदन पत्र, फोटो और हस्ताक्षरों का मिलान करते हुए सत्यापन करें। इस आदेश के तहत प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर ने संभाग स्तर पर चार सदस्यीय जांच समितियां गठित कीं। इन समितियों ने बीकानेर, चूरू, जयपुर, अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, भरतपुर और पाली संभाग से प्राप्त जांच रिपोर्टों के आधार पर 72 कर्मचारियों की भर्ती में गंभीर अनियमितताएं पाईं।
फर्जी दस्तावेज और डमी कैंडिडेट का इस्तेमाल जांच रिपोर्ट के अनुसार खुलासा हुआ है कि कई उम्मीदवारों ने 2016, 2018 और 2021 की शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए। कुछ मामलों में तो डमी कैंडिडेट को परीक्षा में बैठाया गया। जांच में फोटो, हस्ताक्षर और REET पात्रता प्रमाण पत्रों में विसंगतियां सामने आईं। उदाहरण के तौर पर देशराज (पाली), हिमांशु मित्तल (जालोर) और जितेंद्र सिंह (जालोर) के फोटो और हस्ताक्षर आवेदन पत्रों से मेल नहीं खाए। वहीं कुछ मामलों में डिग्री और रीट प्रमाण पत्र पूरी तरह संदिग्ध पाए गए।
जालोर जिले से सर्वाधिक संदिग्ध जांच में खुलासा हुआ है कि सबसे ज्यादा संदिग्ध शिक्षक जालोर जिले से सामने आए हैं। जिनमें लोकेश कुमार साउ दुधा की बेरी जालोर, रेखा मीणा जीतपुरा, जालोर, रुचिका शर्मा पावली, जालोर, प्रकाश भादू कोलियां की बेरी जालोर सहित अन्य शमिल है। इनमें से कुछ 2016 और 2021 की भर्तियों में चयनित हुए थे और वर्तमान में विभिन्न स्कूलों में कार्यरत हैं। SOG ने 72 शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में इस प्रकार के ओर भी नाम आने की संभावना है।
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