अखिल भारतीय राजपुरोहित समाज विकास संस्थान, श्रीखेतेश्वर ब्रह्मधाम तीर्थ, आसोतरा की राष्ट्रीय बैठक हरिद्वार में हुई। बैठक में संगठन मंत्री भगीरथ सिंह मादड़ी ने संस्थान की स्थापना, उद्देश्य और गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजपुरोहित समाज सौभाग
उन्होंने ब्रह्म सावित्री सिद्धपीठ की स्थापना कर समाज को गौरव दिलाया और अपने शिष्य पूज्य सदगुरुदेव तुलछाराम जी महाराज को गद्दी सौंपकर समाज में शिक्षा क्रांति, आर्थिक उत्थान एवं संगठन की भावना को बल दिया।
समाज के सहयोग से हरिद्वार में बनेगा भवन पूज्य सदगुरुदेव श्री श्री तुलछाराम जी महाराज के पावन सान्निध्य एवं वेदांताचार्य डॉ. ध्यानाराम जी महाराज की उपस्थिति में हुई बैठक में हरिद्वार में संस्थान के नवीन भवन निर्माण का प्रस्ताव रखा गया। प्रति फुट ₹25,000 की राशि का संकल्प लिया गया, जिस पर समाजबंधुओं ने सहयोग का आश्वासन दिया। सदगुरुदेव ने कहा-
“जैसे कुलगुरु खेताराम जी बावजी ने हर घर से सहयोग लेकर ब्रह्मधाम का निर्माण कराया, वैसे ही यह भवन भी पूरे समाज के सहयोग से हरिद्वार में बनेगा।”

समाज के उत्थान के लिए रखें सुझाव संस्थान के महामंत्री भैरव सिंह लुंबावास ने आय-व्यय का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। प्रतिनिधि भरत सिंह बारवा ने बताया कि बैठक में देशभर से तीन सौ से ज्यादा समाज के लोग शामिल हुए।
बैठक में मोहन सिंह साकरना, धुक सिंह बाली, शंकर सिंह बसंत, गिरधारीलाल बालोतरा, खुशाल सिंह लूनावास, करण सिंह भैंसर, भरत सिंह बारवा, तग सिंह डोली सहित कई प्रबुद्ध समाज के लोगों ने विचार व्यक्त किए। सभी ने समाज उत्थान के लिए सुझाव रखें।
समाज में प्रेम और सहयोग की भावना को सुदृढ़ रखने का आह्वान पूज्य सद्गुरुदेव श्री श्री तुलछाराम जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी संदेश में समाज में प्रेम, एकजुटता एवं सहयोग की भावना को सुदृढ़ रखने का आह्वान किया। वेदांताचार्य डॉ. ध्यानाराम जी महाराज ने कहा कि संस्थान शिक्षा, सेवा एवं संगठन के क्षेत्र में निरंतर उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। वर्तमान में पांच गुरुकुल संचालित हो रहे हैं, जहां ऋषिकुमार वैदिक और आधुनिक शिक्षा का समन्वित लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
हरिद्वार के “द लेटीट्यूट” होटल में बैठक का शुभारंभ कुल गुरुदेव श्री खेताराम जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। दीप प्रज्वलन का कार्य पूज्य सदगुरुदेव एवं वेदांताचार्य जी ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर संस्थान की कार्यकारिणी ने सद्गुरुदेव के 45वें चातुर्मास तप साधना पूर्ण होने पर 45 किलोग्राम पुष्पहार अर्पित कर उनका अभिनंदन किया। बैठक का समापन गुरुदेव के आशीर्वचनों और समाजबंधुओं के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
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