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जयपुर में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में भारत विभाजन पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।

जयपुर में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में भारत विभाजन पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। परिषद के सह संगठन मंत्री मनोज कुमार ने कहा कि वंदेमातरम गीत के विभाजन से ही भारत विभाजन की नींव पड़ गई थी।

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उन्होंने बताया कि विभाजन के लिए गांधी जी के साथ-साथ अंग्रेज, तत्कालीन राजनैतिक नेतृत्व और समाज भी जिम्मेदार थे। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, मुस्लिम लीग और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जैसी अंग्रेजों द्वारा स्थापित संस्थाओं की भी इसमें भूमिका रही।

पिछले 5-6 दशकों में विभाजन पर तीन प्रकार का साहित्य लिखा गया। पहला विभाजन की पृष्ठभूमि पर, दूसरा विभाजन की पीड़ा पर और तीसरा विस्थापितों की सुरक्षा और अविभाजित भारत की संभावनाओं पर।

कार्यक्रम में विष्णु शर्मा ‘हरिहर’ की दो पुस्तकों ‘बोल री चिड़िया रानी’ और ‘अच्छे लगते फूल’ का विमोचन भी किया गया। साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष इंदु शेखर और बाल साहित्यकार विष्णु हरिहर ने दीप प्रज्ज्वलन किया।

मनोज कुमार ने कहा कि विभाजन के साहित्य को नई पीढ़ी के लिए उनकी भाषा में, आज के संदर्भों के साथ नए रूप में लिखने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में विभाजन की विभीषिका पर आधारित 8 पुस्तकों पर विशेष चर्चा की गई। कार्यक्रम का संयोजन विकास तिवाड़ी ने किया।

रिषद के सह संगठन मंत्री मनोज कुमार ने कहा कि वंदेमातरम गीत के विभाजन से ही भारत विभाजन की नींव पड़ गई थी।

रिषद के सह संगठन मंत्री मनोज कुमार ने कहा कि वंदेमातरम गीत के विभाजन से ही भारत विभाजन की नींव पड़ गई थी।

विष्णु शर्मा ‘हरिहर’ लिखित बाल साहित्य का विमोचन

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में विष्णु शर्मा ‘हरिहर की दो पुस्तकों ‘‘बोल री चिड़िया रानी’’ और ‘‘अच्छे लगते फूल’’ पुस्तक का विमोचन अ. भा. साहित्य परिषद के सह संगठन मंत्री मनोज कुमार और साहित्य परिक्रमा के सम्पादक डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष ने किया। यह दोनों पुस्तक बाल साहित्य हैं जिसमे पहली पुस्तक बोल री चिड़िया रानी बाल कुंडलियों का संग्रह है वहीं दूसरी पुस्तक अच्छे लगते फूल पुस्तक रोला बाला पहेली संग्रह है। उन्होंने अपने संबोधन में अपनी इन दोनों ही पुस्तकों के विषय वस्तु के बारे में जानकारी दी।

इस अवसर पर अल्का सक्सेना, संतोष यादव, रमा सिंह , लक्ष्मण सिंह , मुरारी, जितेन्द्र ,केशव , डॉ ओमप्रकाश ,संजय, डॉ ममता, डॉ हरवीर सिंह, पुरुषोत्तम ,डॉ विपिनचंद्र , डा अमित ,डॉ शुचि, याजवेन्द्र और केन्द्रीय विश्व स्कूल के शोधार्थियों सहित अनेक साहित्यकार और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।



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