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अमर सिंह ब्रांच नहर खतरे के निशान से ऊपर बहने से नोहर के दर्जनों गांवों में पानी घुसने का डर बना हुआ है।
हरियाणा के किशनगढ़ ब्रांच से निकलने वाली अमर सिंह ब्रांच नहर इस समय खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। यह नहर हरियाणा के मोडाखेड़ा गांव से निकलकर राजस्थान में प्रवेश करती है और नोहर क्षेत्र के दर्जनों गांवों को प्रभावित करती है। पिछले तीन दिनों से बुरजी
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन को बार-बार सूचना देने के बावजूद कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई। छानी बड़ी, उदरान, वीरान, बिराण और अन्य गांवों के ग्रामीणों ने स्वयं ही मिट्टी के कट्टे डालकर तटबंधों को मजबूत करने का प्रयास किया है। यदि नहर टूटती है तो सैकड़ों ग्रामीण बेघर हो सकते हैं और हजारों बीघा फसलें पानी में डूब जाएंगी।
भाजपा नेता सत्य प्रकाश चाहर ने बताया कि नहर का पानी जनाना, नेहराना, साहूवाला, झांसल, निनान, मल्लखेडा, बैर, उदरान, बीरान, वीरान, सहित कई गांवों तक खतरा हो चुका है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि अपने-अपने स्तर पर जो भी संसाधन उपलब्ध हों, उनका उपयोग करके तटबंधों को मजबूत करें। चाहर ने कहा कि प्रशासन की लापरवाही से स्थिति और अधिक खराब हो सकती है।
पूर्व विधायक बलवान पुनिया ने इस आपदा के लिए राजस्थान सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग समय रहते नहीं चेता, जिससे अब हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। पुनिया ने मांग की कि सरकार तुरंत राहत टीमों को भेजे और मशीनरी लगाकर तटबंधों की मरम्मत करवाई जाए।
स्थानीय ग्रामीण बजरंग मेघवाल का कहना है कि वह पिछले तीन दिनों से प्रशासन को अवगत करवा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने चिंता जताई कि कहीं पंजाब जैसी स्थिति यहां भी न बन जाए।
हालांकि शुक्रवार को विधायक संजीव बेनीवाल, एसडीएम कल्पित शिवराण, तहसीलदार धर्मेंद्र जांदू और सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से सहयोग की अपील की है। फिलहाल ग्रामीणों को प्रशासन की ओर से ठोस राहत का इंतजार है, जबकि खेतों और घरों में पानी घुसने का डर लगातार बना हुआ है।
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