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अलवर के ईसाई मिशनरी हॉस्टल में 15 साल से छोटे बच्चों के धर्म परिवर्तन का खेल चल रहा था। यहां करीब 60 बच्चों को रखा गया था। धर्म परिवर्तन के मास्टरमाइंड ने दिखावे के लिए बच्चों का एडमिशन सरकारी स्कूल में करवा रखा था। यहां तक कि बच्चों के नाम भी हिंदू

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8 साल के एक बच्चे को जोसेफ नाम दिया गया था। किसी का योहना तो किसी का नाम बदलकर जॉय रख दिया गया था। स्कूल से पढ़ाई के बाद बच्चे लौटकर हॉस्टल में आते। जहां उनका ब्रेनवॉश किया जाता। ईसाई धर्म की धार्मिक पुस्तकें पढ़वाई जाती।

इस मामले में पुलिस ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जिनसे पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं। धर्म परिवर्तन के लिए आरोपियों को दूसरे राज्यों से फंडिंग हो रही थी। छोटे-छोटे स्कूली बच्चों के ब्रेनवॉश के लिए से चेन्नई से स्पेशल ट्रेनिंग देकर भेजा जाता था। पढ़िए- पूरी रिपोर्ट…

अलवर के एमआईए थाना क्षेत्र में बना हॉस्टल, यहां करीब 60 बच्चों को रखा गया था।

अलवर के एमआईए थाना क्षेत्र में बना हॉस्टल, यहां करीब 60 बच्चों को रखा गया था।

15 साल से चल रहा हॉस्टल, प्रचारक बदलते रहते थे

एमआईए थाना क्षेत्र की सैय्यद कॉलोनी में ये हॉस्टल 15 साल से चल रहा है। तब से ही गैंग के लोग यहां धर्म परिवर्तन से जुड़ी गतिविधियां कर रहे थे। गरीब परिवारों को उनके बच्चों को दो वक्त का अच्छा खाना और बेहतर परवरिश का झांसा देकर हॉस्टल में लाते। जो बच्चे तैयार हो जाते, उसकी जानकारी चेन्नई स्थित संस्था को दी जाती, जो उसे रेगुलेट करती थी। फंड मिलते ही बच्चों को हॉस्टल में रखकर आसपास के सरकारी स्कूलों में एडमिशन करवा देते थे, ताकि उनके घरवालों को ये दिलासा रहे कि बच्चे स्कूल में पढ़ रहे हैं।

हॉस्टल में बच्चों का ब्रेनवॉश किया जाता। यहां प्रचारकों को बदल-बदल कर भेजा जाता था। हॉस्टल के पास ही रहने वाले एक शख्स पप्पू नट ने बताया कि यहां पर सुबह बच्चों की प्रेयर होती थी। हर रविवार को इनके पेरेंट्स को बुलाकर प्रार्थना सभा और धर्म कीर्तन किया जाता था। अंदर क्या होता था ये नहीं पता, लेकिन सुबह बच्चे स्कूल जाते थे। हॉस्टल में सारे बच्चे ये बाहर के ही लेते थे, लोकल को मना कर देते।

छोटे बच्चों के धर्मांतरण के लिए पहले ट्रेनिंग

भास्कर ने मामले की जानकारी जुटाई तो सामने आया कि बेंगलुरु, चेन्नई से मामले के तार जुड़े हैं। अलवर एसपी सुधीर चौधरी ने बताया कि ट्रेनिंग और फंडिंग की बात सामने आ रही है। फंडिंग तो होती ही है। ट्रेनिंग के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं।

एमआईए थानाधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि फिलहाल पुलिस ने सोहन सिंह और बोध अमृत सिंह को गिरफ्तार किया है। अमृत ने साल 2006 में ईसाई धर्म अपनाया था। उसकी ट्रेनिंग चेन्नई में हुई थी। उसके साथ 15 ट्रेनी और थे। लेकिन अमृत को संस्था ने ट्रेनर के लिए चुना। ट्रेनिंग में उसे सिखाया गया कि कैसे लोगों को धर्म में कन्वर्ट करना है। कैसे बच्चों का ब्रेनवॉश करना है।

वहीं, दूसरा आरोपी सोहन हॉस्टल के निर्माण के समय बेलदारी का काम करता था। बाद में उसका भी ब्रेनवॉश कर धर्म परिवर्तन कराया गया। सीकर से एक महीना पहले गिरफ्तार एक मास्टरमाइंड सेल्वा ने ही अलवर में इस हॉस्टल की नींव रखी थी। इनका टारगेट छोटी उम्र के बच्चों का ही धर्म परिवर्तन का था।

छापे के दौरान हॉस्टल में मौजूद बच्चे डर के कारण विंडो के पास आ गए थे, जिन्हें समझाइश के बाद नीचे उतारा गया।

छापे के दौरान हॉस्टल में मौजूद बच्चे डर के कारण विंडो के पास आ गए थे, जिन्हें समझाइश के बाद नीचे उतारा गया।

हॉस्टल में बच्चों के नाम तक बदल दिए

विहिप नेता वीरेंद्र ने बताया कि हॉस्टल में बच्चों को रखने के पीछे ये मकसद था कि बच्चों को जो सिखाया जाए, वही सीखते हैं। ऐसे में छोटी उम्र से ही उनके दिमाग में हिंदू देवी-देवता के प्रति गलत सोच भरी जा रही थी। इन्हें स्लीपर सेल की तरह तैयार किया जा रहा था। बच्चों के नाम तक बदले गए थे।

वीरेंद्र ने बताया कि मौके पर हमें एक बच्चा मिला, जिसकी उम्र आठ साल थी। उसका नाम पूछा तो जोसेफ बताया। दोबारा पूछने पर उसने अपना असली नाम बताया। वहीं एक ओर बच्चे को यहां योहना नाम से बुलाते थे जबकि उसका सही नाम कुछ और था। एक बच्चा मिला, जिसे वहां जॉय बुला रहे थे। सभी बच्चे पहले हिंदू या सिख थे।

19 साल से धर्मांतरण करवाने में लगा, अलग-अलग जिलों में कर चुका काम

जांच अधिकारी मनोहर लाल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी बोध अमृत साल 2006 से इस संस्था से जुड़ा हुआ है। वह मूल रूप से गुजरात का है और करीब 19 साल से वह धर्मांतरण में लगा है। एक महीने पहले ही सीकर में धर्मांतरण गैंग को पुलिस ने पकड़ा था। वहां से बोध अमृत भी गिरफ्तार किया गया था। हाल में ही वह जमानत पर छूटा था।

अलवर से पहले आरोपी श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर में था और वहां धर्मांतरण की गतिविधियां कर रहा था। अलवर में इस हॉस्टल में चेन्नई की संस्था ने उसे वार्डन बनाकर दो महीने पहले भेजा था। जमानत पर छूटने से बाद 10 दिन पहले ही वह हॉस्टल में आया था। पुलिस अमृत के बारे में और ज्यादा जानकारी जुटाने में लगी है। सीकर में वह सेल्वा के साथ इस काम में लगा था। सेल्वा सीकर में धर्मांतरण गैंग का मास्टरमाइंड है।

पूछताछ में माना- बच्चों को बाइबल पढ़ाते थे, ईसाई धर्म के लिए प्रेरित करते थे

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने बताया कि हॉस्टल में बच्चों को बाइबल पढ़ने को देते थे। उनसे ईसाई धर्म की प्रेयर करवाते थे और ईसाई धर्म के प्रति प्रेरित करते थे। पुलिस ने शुक्रवार को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस अब बच्चों के बयान लेगी और साथ ही आरोपियों ओर संस्था के अकाउंट्स खंगालेगी। ताकि और जानकारी सामने आ सके।

हॉस्टल की 10 फीट ऊंची दीवार, दो फीट की तारबंदी

कोई बच्चा भाग न सके या कोई बाहरी व्यक्ति गतिविधियों पर नजर नहीं रख सके, इसके लिए हॉस्टल की दीवार 10 फीट ऊंची बना रखी है। ऊपर भी दो फीट तक तारबंदी की गई है।

मुकदमा दर्ज करवाने वाले विश्व हिंदू परिषद के शहर महामंत्री वीरेंद्र ने बताया कि जो बच्चा प्रेयर नहीं करता था, उसके साथ मारपीट की जाती थी। उनके मुताबिक बच्चों ने ये बात बताई है। बच्चों को हॉस्टल में पानी की बाल्टी में मूर्तियां डुबोकर दिखाई जाती ओर कहते की हिंदू देवी-देवता तो पानी में डूब जाते हैं। क्रॉस नहीं डूबता। कहते- हिंदू भगवान नर्क में भेजता है, हमारा गॉड स्वर्ग में भेजता है।

हॉस्टल की दीवारें 10 फीट ऊंची बनाई गई हैं। उस पर भी तारबंदी की गई है।

हॉस्टल की दीवारें 10 फीट ऊंची बनाई गई हैं। उस पर भी तारबंदी की गई है।

पहले भी इस संस्था से लोगों की करवाई थी घर वापसी

विहिप के महामंत्री वीरेंद्र ने बताया कि संस्था के हॉस्टल में सालों से ये खेल चल रहा है। पहले भी बच्चों के नाम पर उनके परिवार के सदस्यों को संस्था से जोड़ा था। इसके अलावा संस्था के कई सदस्यों ने लोगों का धर्म परिवर्तन करवाया था। सात साल पहले भी इसी हॉस्टल से जुड़े लोगों के संपर्क में आने के बाद धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों की धर्म वापसी करवाई गई थी।

बेंगलुरु और दूसरे राज्यों से हो रही धर्मांतरण के लिए फंडिंग

एमआईए थाने के जांच अधिकारी मनोहर ने बताया कि इस हॉस्टल का संचालन चेन्नई की संस्था एफएमबीपी करती है। ये संस्था अलग-अलग राज्यों में इस तरह की प्रेयर, मीटिंग करवाती है। इसकी कई राज्यों में शाखाएं हैं, जो हॉस्टल भी ऑपरेट करती हैं।

इसके लिए चेन्नई की संस्था ही पैसे अरेंज करती है। बड़ी मात्रा में इन्हें फंडिंग मिलती है। इन पैसों का इस्तेमाल गरीब लोगों को लालच देने में किया जाता है। पुलिस को कई ट्रांजैक्शन की डिटेल आरोपियों से मिली है। अभी इसमें विस्तृत जांच जारी है।

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