चित्तौड़गढ़ के राजकीय मेडिकल कॉलेज में हाल ही में ग्रेड सेकंड नर्स, लैब टेक्नीशियन और सहायक लाइब्रेरियन की सेवाओं के लिए मैनपावर की आवश्यकता बताई गई। इसके लिए कॉलेज प्रशासन ने 12 सितंबर को टेंडर जारी किया था। यह टेंडर लगभग 75 लाख रुपए का था और इसमें
यहीं से सवाल उठने लगे क्योंकि इसी कंपनी के खिलाफ हाल ही में प्रतापगढ़ जिला हॉस्पिटल में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया था। प्रतापगढ़ जिला हॉस्पिटल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) डॉक्टर आलोक कुमार ने 23 सितंबर को नित्या एंटरप्राइजेज की अमानत राशि जब्त करते हुए उनका टेंडर खारिज कर दिया था। यानी, जिस कंपनी पर एक दिन पहले ही कार्रवाई हुई, अगले ही दिन चित्तौड़गढ़ मेडिकल कॉलेज का बड़ा ठेका उसी कंपनी को सौंप दिया गया।
लगभग 1 लाख की अमानत राशि प्रतापगढ़ में हुई जब्त
प्रतापगढ़ जिला हॉस्पिटल में पार्किंग संचालन का ठेका नित्या एंटरप्राइजेज को दिया गया था। यह टेंडर 20 मई को जारी हुआ था और 1 जुलाई से कंपनी ने काम शुरू किया। नियम के अनुसार कंपनी को मरीजों और उनके परिजनों के लिए पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त रखनी थी। लेकिन हॉस्पिटल प्रबंधन का आरोप है कि कंपनी ने नियमों की अनदेखी की।

प्रतापगढ़ जिला हॉस्पिटल के PMO ने लगाया लापरवाही का आरोप।
मरीजों और परिजनों को पार्किंग को लेकर लगातार परेशानियां झेलनी पड़ीं। कंपनी को कई बार मौखिक और लिखित नोटिस भी दिए गए, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद प्रतापगढ़ के जिला कलेक्टर के आदेश पर एक जांच कमेटी बनाई गई। जांच में साफ हुआ कि कंपनी ने टेंडर की शर्तों का उल्लंघन किया है। नतीजतन, 23 सितंबर को कंपनी का ठेका रद्द कर दिया गया और लगभग 99 हजार 999 रुपए की उसकी अमानत राशि भी जब्त कर ली गई।
चित्तौड़गढ़ मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने जताया भरोसा
जब इस मामले पर चित्तौड़गढ़ मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर प्रमोद तिवारी से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि नित्या एंटरप्राइजेज पिछले डेढ़ साल से कॉलेज में काम कर रही है और अब तक कोई शिकायत सामने नहीं आई है। इसलिए कॉलेज प्रशासन को इस कंपनी पर भरोसा है। डॉक्टर तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भविष्य में कोई शिकायत मिलती है तो कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।
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