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एसआई भर्ती को लेकर आरपीएससी के पूर्व चेयरमैन संजय क्षोत्रिय व सदस्यों पर हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद अब संगीता आर्य और मंजू शर्मा की सदस्यता पर संकट गहरा गया है। एक सदस्य बाबूलाल कटारा पेपर लीक मामले से गिरफ्तारी के बाद से निलंबित हैं। आरपीएससी
सरकारी सूत्रों का कहना है अदालत ने आरपीएससी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दो महिला सदस्यों की भूमिका भी संदिग्ध मानी है। आरपीएससी के खिलाफ पीआईएल दर्ज करने तक के निर्देश दिए हैं। सरकार की पहले दिन से मंशा आरपीएससी के ढांचे को सुधारने की रही है। इस मामले में भी वैसी ही प्रक्रिया अपनाई जाएगी जैसी बाबूलाल कटारा के मामले में अपनाई गई थी। शेष | पेज 17
सदस्य संगीता आर्य और मंजू शर्मा की नियुक्तियां कांग्रेस शासन में वर्ष 2020 में की गई थीं और उनका कार्यकाल अगले साल अक्टूबर में पूरा होगा। ऐसे में करीब 14 महीने का कार्यकाल बचा है। सरकार इस मामले में जल्द ही कार्रवाई शुरू कर सकती है।
आरपीएससी अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, लेकिन उन्हें हटाने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति को है। राज्य सरकार उनके खिलाफ जांच करवाने के लिए राष्ट्रपति को आग्रह कर सकती है। राष्ट्रपति की ओर से मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज करते हैं। इसके आदेश के बाद राज्यपाल सदस्य या अध्यक्ष को सस्पेंड कर सकते हैं।
कटारा मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किए गए बाबूलाल कटारा को हटाने के लिए राज्य सरकार की ओर से राष्ट्रपति को लिखा गया था। राष्ट्रपति की ओर से मामला सुप्रीम कोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए भेजते ही 26 जनवरी, 2024 को राज्यपाल ने कटारा को सस्पेंड कर दिया था। कटारा के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। अगली सुनवाई सोमवार को प्रस्तावित है। आरपीएससी के अनुसार कटारा का कार्यकाल 14 अक्टूबर, 2026 तक है।
नोट – मौजूदा भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल में सिर्फ नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। तीन सदस्यों की संख्या बढ़ाई जरूर है। लेकिन, अभी तक एक भी सदस्य की नियुक्ति सरकार ने नहीं की है। दो और सदस्यों पर कार्रवाई कर सरकार नए सिरे से सदस्यों की नियुक्ति पर विचार कर रही है।
विधि मंत्री जोगाराम पटेल बोले : कोर्ट ने जिन सदस्यों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, उन पर भी होगी कार्रवाई
विधि मंत्री जोगाराम पटेल का कहना है कि हाई कोर्ट ने आरपीएससी के मौजूदा और पूर्व सदस्यों को लेकर जो भी निर्देश दिए हैं, उनकी सरकार पालना करेगी। विधि विभाग 202 पेज के फैसले का अध्ययन कर रहा है। कोर्ट ने सदस्यों पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं।
सरकार ऐसे सदस्यों को हटाने के लिए भी अलग से कार्रवाई करेगी, फिर चाहे वह संगीता आर्य हों या मंजू शर्मा। एसआई भर्ती पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा था कि ‘घर के भेदियों ने लंका ढहा दी।’ ऐसे में सरकार की प्राथमिकता है कि आरपीएससी शुचिता फिर से कायम हो। एसआई भर्ती को कोर्ट ने रद्द किया है। सरकार इसकी पालना करेगी।
इधर, क्षोत्रिय बोले-पैनल में पुलिस अफसर भी शामिल थे
दूसरी ओर, आरपीएससी के पूर्व चेयरमैन संजय क्षोत्रिय का कहना है कि एसआई भर्ती पेपर लीक मामले में हर स्तर पर जांच हो। इंटरव्यू पैनल में 6 पुलिस अधिकारी भी थे। इनसे पूछताछ की जाए। परीक्षा में जो भी गड़बड़ी हुई, वह 2021 में हुई। उस समय तत्कालीन अध्यक्ष भूपेंद्र यादव (पूर्व डीजीपी) थे। उनके बाद शिव सिंह राठौड़, जसवंत राठी रहे। मैं फरवरी 2022 में अध्यक्ष बना। यह जो गड़बड़ी है, वह 2021 की है। इसके बारे में मैं क्या कहूं, लेकिन पूरे आयोग की संलिप्तता बताना उचित नहीं है। इंटरव्यू में अकेला कोई व्यक्ति फेवर कर ही नहीं सकता। अगर मैं किसी को फेवर करना चाहता तो क्या 50 में से सिर्फ 28 नंबर देता?
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