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मंडरायल में छात्राओं की उच्च शिक्षा के लिए स्थापित गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है।
मंडरायल में छात्राओं की उच्च शिक्षा के लिए स्थापित गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है। इस सत्र में 100 सीटें स्वीकृत होने के बावजूद केवल 11 छात्राओं ने ही प्रवेश लिया है, जिससे महाविद्यालय अपनी पहचान बनाने में संघर्ष कर रहा है।
भवन, विषय-व्याख्याताओं और मूलभूत सुविधाओं की कमी इसका मुख्य कारण है। महाविद्यालय का भवन वर्तमान में निर्माणाधीन है, जिस पर लगभग 4.5 करोड़ रुपए की लागत आ रही है। भवन तैयार होने तक कक्षाएं राजकीय महाविद्यालय मंडरायल में संचालित की जा रही हैं, जिसके कारण छात्राओं को पढ़ाई के लिए लगभग 5 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
पंचायत भवन में अस्थायी रूप से उपलब्ध कराए गए दो कक्ष भी जर्जर स्थिति के कारण उपयोग में नहीं लाए जा सके। उच्च शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार यदि किसी कक्षा में 20 से कम छात्र-छात्राएं प्रवेश लेते हैं तो नियमित कक्षाएं संचालित नहीं की जाती हैं। इसी कारण कन्या महाविद्यालय की छात्राओं को अब राजकीय महाविद्यालय में जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
मंडरायल कन्या महाविद्यालय की शुरुआत पूर्व मंत्री और पूर्व सपोटरा विधायक रमेश मीणा ने वर्ष 2022 में अपने कार्यकाल के दौरान करवाई थी। हालांकि, तब से अब तक संसाधनों की कमी पूरी नहीं हो सकी है। वर्तमान सपोटरा विधायक हंसराज मीणा ने बताया कि कांग्रेस सरकार ने महाविद्यालय शुरू तो किया, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने भाजपा सरकार बनने के बाद उप मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री से दो बार मुलाकात कर कॉलेज में विषय-व्याख्याताओं की नियुक्ति, भवन निर्माण कार्य और संसाधनों की पूर्ति की मांग रखी है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते महाविद्यालय को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए, तो यह केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा। ऐसी स्थिति में छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए मजबूरन अन्य स्थानों पर जाना पड़ेगा।
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