आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज धर्मसभा को संबोधित करते हुए।
आचार्य श्री वर्धमान महाराज ने शनिवार को धर्मसभा में कहा- णमोकार मंत्र का जाप कलर थेरेपी के अनुसार किया जा सकता है। इससे लोगों के दुख, पीड़ा दूर हो जाती है।
आचार्य श्री ने कहा- णमोकार महामंत्र में पांच पद होते है, जो कलर थेरेपी का कार्य करते है। इनमें श्वेत कलर णमो अरिहंताणम के जाप्य करने के लिए, लाल कलर णमो सिद्धाणम के जाप्य करने के लिए, हरा कलर णमो आईरियाणम के जाप्य के लिए, नीला कलर णमो उवज्झायाणम के जाप्य के लिए और काला कलर णमो लोए सवसाहूणम के जाप के लिए किया जाता है।
उन्होंने कहा- जिस प्रकार जैन धर्म ध्वज में पांच कलर होते है, उसी प्रकार पंच परमेष्ठि का जाप इन कलर की माला के माध्यम से कर सकते है। यह एक प्रकार से कलर थैरेपी का कार्य करता है। इसके जाप्य करने से सारे दुख पीड़ाएं खत्म हो जाती है । आचार्य श्री के प्रवचन से पूर्व मुनि श्री प्रभव सागर जी महाराज का प्रवचन हुआ मुनि श्री ने सात तत्व जीव, अजीव, आस्त्रव, बंध, संवर, निर्जरा व मोक्ष तथा चार कषाय क्रोध, मान, माया, लोभ के बारे में बताया ।
समाज के धर्म प्रचारक पवन कंटान व विकास जागीरदार के अनुसार- धर्म सभा में श्रीजी और पूर्वाचार्य का चित्र का अनावरण दीप प्रज्वलन श्रीजी मार्जन समिति आदर्श नगर के सदस्यों द्वारा कर आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की। सुनील सर्राफ ने पूजन व्यवस्था में सहयोग किया।
आचार्य श्री संघ के आहार के चौके लगाने के लिए बाहर के नगरों से काफी भक्त पधार रहे हैं। टोंक सहित इंदौर, पारसोला, निवाई के चौके लगे हैं। शनिवार को छोटू विजय नगर वाला परिवार को आचार्य श्री का आहार कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

जैन नसिया में आयोजित पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज।
राष्ट्रीय संगोष्ठी कल समाज के मीडिया प्रकोष्ठ मंत्री रमेश काला एवं विमल जोला में बताया- आज रविवार को शांति समागम राष्ट्रीय पत्रकार संगोष्ठी होगी। इसमें देशभर से पत्रकार आएंगे। इस दौरान सामाजिक समरसता में चरित्र चक्रवर्ती का योगदान, प्रथमाचार्य और उनके जीवन मूल्यों की वर्तमान में प्रासंगिकता, प्रथमाचार्य श्री शांति सागर महाराज का जैन दर्शन को अवदान आदि विषयों पर संगोष्ठी होगी।
बता दें कि 26 जुलाई (शनिवार) को टोंक के पत्रकारों की संगोष्ठी हुई। इसमें उन्होंने कहा- देशवासियों को भारतीय संस्कृति को नहीं छोड़ना चाहिए। इससे समाज और सामाजिकता बनी रहेगी। सभी को पहले राष्ट्रीयता का ध्यान रखना चाहिए। माता पिता को पाने पास रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैन धर्म का मूल भाव सर्वधर्म के साथ मैत्री पूर्ण भाव रखना है। अहिंसा के रास्ते पर चलना है।
इस मौके पर भागचंद फूलेता, धर्मचंद दाखिया, कमल आंडरा, राजेश सर्राफ, राजेश आरटी, लालचंद फूलेता, मुकेश बरवास, कमल सर्राफ, पंकज फूलेता, ओम ककोड़, अंशुल आरटी, अम्मू छामुनिया, अंकुर पाटनी, सुमित दाखिया, अशोक झिराना, पंकज कल्ली, आशु दाखिया, उमेश संघी, धर्मेंद्र पासरोटियां, धर्मचंद पतल दोना, विनायक कल्ली आदि उपस्थित रहे।
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