आचार्य ने राखी के त्योहार का महत्ब बताते हुए उसे रक्षा का प्रतीक बताया।
आचार्य संघ के सानिध्य में शनिवार को 1008 श्री श्रेयांसनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक अवसर पर निर्वाण लाडू और श्री अकंपनाचार्य, विष्णु मुनिराज सहित 700 मुनिराज का पूजन किया गया। इस अवसर पर धर्म सभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में कहा- 700 मु
मुनियों में संस्कृति का वात्सल्य
आचार्य श्री ने उज्जैनी नगरी की कथा के माध्यम से बताया कि अकंपनाचार्य आचार्य सहित 700 मुनिराज पर हस्तिनापुर में राजा बलि ने उपसर्ग किया था, तब विक्रिया रिद्धि के माध्यम से महामुनि विष्णुकुमार ने उपसर्ग को दूर किया था क्योंकि मुनियों में धर्म, धर्मात्मा और संस्कृति के प्रति वात्सल्य भाव रहता हैं और यह उपसर्ग रक्षाबंधन पूर्णिमा के दिवस दूर हुआ । इसी कारण इस रक्षाबंधन पर्व को वात्सल्य पूर्णिमा भी कहा जाता है।
हुमायूं को भेजी थी राखी
राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने एक अन्य कथा के माध्यम से बताया कि चित्तौड़ की एक हिंदू रानी पर जब शत्रु ने हमला बोला तब उन्होंने हुमायूं राजा के पास राखी भेजी थी, तब राजा हुमायूं ने रानी रानी की रक्षा राज्य सहित की थी। इसी कारण उस दिन से रक्षाबंधन पर्व का महत्त्व और बढ़ है। राखी रक्षा का प्रतीक है भाई बहन के साथ धर्म धर्मात्मा और संस्कृति की रक्षा करना सबका कर्तव्य है।
अन्य जातियों के प्रवेश के विरोध में अन्न-जल का त्याग
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने जैन धर्म की दृष्टि से एक और कथानक के माध्यम से बताया कि जैन मंदिरों में अन्य जाति के लोगों के प्रवेश के विरोध में प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने 1105 दिनों तक अन्न आहार का त्याग किया था । कोर्ट का फैसला जैन समाज के पक्ष में आने के बाद उन्होंने अन्न आहार आज के ही पूर्णिमा रक्षाबंधन के दिन ग्रहण किया था। आचार्य श्री ने बताया कि राखी का त्योहार धर्म धर्मात्मा , संस्कृति जिनालय की रक्षा का संकल्प लेने से पूर्ण होगा। समाज के मीडिया प्रभारी पवन कंटान व विकास जागीरदार ने बताया कि इसके पूर्व विधान का आयोजन हुआ।

श्रद्धालुओं ने श्रेयांशनाथ भगवान का निर्वाण मोदक चढ़ाया।
इस पर सुनील कुमार, कमल कुमार सर्राफ, नेमीचंद, जितेंद्र कुमार बनेठा, पारसचंद, अनिल कुमार सर्राफ, महावीर प्रसाद, धर्मचंद दाखिया, लालचंद आशु फूलेता, धर्मचंद, अभिषेक कुमार आड़रा परिवारों द्वारा 700_ 700 नारियल विधान पर श्रीफल चढ़ाए ।
आचार्य श्री संघ सानिध्य में श्री आदिनाथ मंदिर नसिया में श्रद्धालुओं द्वारा श्रेयांसनाथ भगवान का निर्वाण कांड बोलकर निर्वाण मोदक चढ़ाए गए । इस मौके पर आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज की प्रथम पिच्छिका पर राखी बांधने का सौभाग्य धर्मचंद, शांतिदेवी, अभिषेक कुमार, नेहा जैन आड़रा परिवार ने की। इस मौके पर मुनि हितेंद्र सागर जी महाराज ने सकल दिगंबर जैन समाज के सभी श्रावकगण को साधु संतों के प्रति हमेशा समर्पित रहने और उनकी सेवा में तत्पर रहने का संकल्प दिलाया।
इस मौके पर टोंक-सवाई माधोपुर पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज से आशीर्वाद लिया। प्रतिदिन राजस्थान के अनेक नगरों से भक्त दर्शन के लिए पधार रहे हैं।
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments