श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की।
आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने कहा कि प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज परम तपस्वी रहे, 35 वर्ष के साधु जीवन में 9938 उपवास किए। दिगंबर मन्दिरों जैन धर्म संस्कृति की रक्षा के लिए 1105 दिनों तक अन्न आहार का त्याग किया। 5 रसों फल का त्याग कर दूध
स्वभाव से परंपरा पालन की शक्ति मिले
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दो दिवसीय विद्वत संगोष्ठी के अवसर पर कहा कि साधु का भाषा पर नियंत्रण होना चाहिए। आचार्य श्री शांति सागर जी जीवंत समयसार रहे। वह उपदेश में समयसार के पूर्व महाबंध ग्रन्थ स्वाध्याय की प्रेरणा देते थे। वे आध्यात्मिक उद्योगपति थे, जीवन में धर्म, चारित्र, समिति संयम,तप आदि का उद्यम कर आत्मा को सार्थक किया। हमारी भी ऐसी भावना हो कि आचार्य शांति सागर जी महाराज की परंपरा पालन की शक्ति प्राप्त हो।

इंद्र ध्वज महामंडल विधान में स्थापित होने वाली 458 प्रतिमाओं की सफाई) करते हुए बच्चे।
जिनवाणी भेंट की
राकेश पंचोलिया और अनिल कंटान, सुमित दाखिया एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुनील संचय ललितपुर ने बताया कि संगोष्ठी का शुभारंभ मूल नायक श्री आदिनाथ भगवान ,आचार्य श्री शांति सागर जी एवं पूर्वाचार्यों के चित्रों दीप प्रज्ज्वलित कर किया। विद्वान फूलचंद प्रेमी वाराणसी, जयकुमार मुजफ्फरनगर, जय कुमार उपाध्याय दिल्ली, नरेंद्र जैन टीकमगढ़ प्रमोद कुमार शास्त्री टोंक ने दीप प्रवज्जलन कर आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की।
458 अकृत्रिम जिन चैत्यालय स्थापित होंगे
समाज के प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीदार ने बताया कि 25 अगस्त को चारित्र चक्रवर्ती 108आचार्य शांति सागर जी महाराज के समाधि दिवस पर श्री दिगंबर जैन नसिया में आचार्य शांति सागर जी महाराज की का पूजन एवं शांति सागर मंडल विधान का आयोजन किया जाएगा। समाज के कमल सर्राफ एवं धर्मेंद्र पासरोटियां ने बताया कि 28 अगस्त से जैन धर्म के दशलक्षण महापर्व शुरू हो रहे हैं , जिसके तहत इंद्र ध्वज महामंडल विधान का कार्यक्रम आयोजित होगा। उसमें 458 अकृत्रिम जिन चैत्यालय एवं पांच पंचमेरु जी स्थापित होंगे।
जिनकी प्रतिदिन पूजा आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में होगी। जिसमें लगभग 300 लोग सम्मिलित होंगे । जिसकी तैयारियां की जैन नसिया में जोर-जोर से चल रही है। आज बच्चों ने इंद्र ध्वज महामंडल विधान में स्थापित होने वाली 458 प्रतिमाओं की सफाई की।
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