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प्रदेश भर के आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित बच्चों को अब सरकारी स्कूलों के शिक्षक पढ़ाएंगे। यह व्यवस्था 5 से 6 वर्ष के विद्यार्थियों को कक्षा1 में जाने के लिए तैयार करने एवं स्कूलों के वातावरण के अनुकूल बनाने हेतु लागू की जा रही है। इसके लिए शिक्षक य
इधर, शिक्षा विभाग ने समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा है कि आंगनबाड़ी में पांच से छह वर्ष के बच्चों के शिक्षण के लिए शिक्षकों का चयन करें। इसमें महिला शिक्षकों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। दिशा निर्देशों के अनुसार राज्य के 4269 स्कूलों में यह कार्य प्रबोधक या शिक्षक करेंगे। वे सप्ताह में पांच दिन समन्वित आंगनबाड़ी केंद्र में 5 से 6 वर्ष के विद्यार्थियों को शिक्षण कार्य करवाएंगे।
शिक्षक रोजाना डेढ़ घंटे बच्चों के साथ बिताएंगे। इसमें से आधा घंटे किलकारी एवं उमंग पुस्तक का रिवीजन कराएंगे और 1 घंटे तरंग पुस्तक का शिक्षण कराएंगे। इसी तरह 16780 स्कूलों में आंगनबाड़ी केंद्र भौतिक रूप से समन्वित है, उन स्कूलों के अनुभवी शिक्षक सप्ताह में तीन दिन शिक्षण कार्य करवाएंगे। इन्हें भी डेढ़ घंटे तक किलकारी, उमंग और तरंग पुस्तक से शिक्षण और दोहराव करवाना होगा। वहीं, उन स्कूलों में जहां आंगनबाड़ी केंद्र प्रशासनिक रूप से समन्वित है। ऐसी स्कूलों के अनुभवी शिक्षक सप्ताह में तीन दिन डेढ़ घंटे तक 5 से 6 वर्ष के विद्यार्थियों को शिक्षण कार्य करवाएंगे। प्रदेश में 62 हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों में 50 हजार से ज्यादा ग्रामीण, साढ़े तीन हजार से ज्यादा शहरी और आठ हजार से ज्यादा जनजातीय क्षेत्रों में है।
मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी संस्था प्रधान की
महिला शिक्षक को प्राथमिकता देने के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि शिक्षकों का बालकों के साथ संवाद मित्रतापूर्ण होगा। संस्था प्रधान इसकी मॉनिटरिंग करेंगे। ताकि बच्चों को स्कूली वातावरण के अनुकूल बनाया जा सके। उल्लेखनीय है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से 3 से 6 साल के बच्चों के लिए शाला पूर्व शिक्षा कार्यक्रम संचालित किया जाता है। इसमें सवा आठ लाख से ज्यादा बालक और आठ लाख बालिकाएं पंजीकृत हैं।
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