सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्ट्रीट डॉग्स को पकड़ने के आदेश पर पशु प्रेमी प्रोटेस्ट पर उतर चुके हैं। मंगलवार को अजमेर में भी डॉग्स लवर्स की ओर से शांति मार्च निकालकर विरोध किया गया।
इस दौरान कई पशु प्रेमियों ने हाथों में स्ट्रीट डॉग्स और तख्तियां लेकर मार्च निकाला। मार्च पुरानी चौपाटी से शुरू हुआ जो की विभिन्न मार्गो से होते हुए नई चौपाटी पर समाप्त हुआ। 3 किलोमीटर तक निकलने वाले इस मार्च में अलग-अलग संस्थाओं के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
पहले देखे प्रोटेस्ट की कुछ फोटोस….

मंगलवार को अजमेर में भी डॉग्स लवर्स की ओर से शांति मार्च निकालकर विरोध किया गया।

3 किलोमीटर तक निकलने वाले इस मार्च में अलग-अलग संस्थाओं के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

पशु प्रेमियों ने हाथों में स्ट्रीट डॉग्स और तख्तियां लेकर मार्च निकाला। मार्च पुरानी चौपाटी से शुरू हुआ जो की विभिन्न मार्गो से होते हुए नई चौपाटी पर समाप्त हुआ।
डॉग लवर रक्षिता राठौड़ ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्ट्रीट डॉग्स को सड़कों से हटाने का आदेश दिया गया है। इसी को लेकर यह मार्च निकाला जा रहा है। सारे डॉग्स रैबिट या एग्रेसिव नहीं होते हैं। सभी डॉग्स को एक साथ लेकर डिसीजन नहीं लेना चाहिए। आज विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर यह साइलेंट मार्च निकाला है। पोस्टर के जरिए सभी को एकजुट होने का संदेश दिया गया है।
नीतू कंवर ने बताया कि हम बेजुबानों के लिए प्रोटेस्ट कर रहे हैं। इन बेजुबानों को कभी भी टाइम पर खाना नहीं मिलता है। कभी गाड़ियों के नीचे आ जाते हैं तो कभी कुछ उनके साथ हादसा हो जाता है। स्ट्रीट डॉग्स को उनके जीने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
अगर इंसान को एक पिंजरे में कैद कर दिया जाए और वहीं पर खाना पीना रहने के लिए दिया जाए तो कैसा फील होगा। स्वतंत्रता का अधिकार सभी को मिला हुआ है। बेजुबानो को भी जीने का अधिकार दिया जाए इसी को लेकर यह प्रोटेस्ट किया गया है।

सड़कों और गली मोहल्ला में भटक रहे करीब 5 हजार आवारा कुत्तों से निपटने के लिए कोई प्लान तक नहीं है।
अजमेर में 5000 से ज्यादा स्ट्रीट डॉग्स
अजमेर नगर निगम के पास शेल्टर होम तो दूर सड़कों और गली मोहल्ला में भटक रहे करीब 5 हजार आवारा कुत्तों से निपटने के लिए कोई प्लान तक नहीं है। निगम ने आवारा कुत्तों की संख्या कम करने के लिए टोलफा को उनकी नसबंदी का ठेका दिया है। एक नसबंदी करने पर 845 रुपए दिए जाते हैं और 1 साल में 3005 की नसबंदी का टारगेट दिया है, लेकिन यह प्रभाव भी नहीं है।
20 से 25 लोग रोज पहुंच रहे हॉस्पिटल
अजमेर के जेएलएन अस्पताल में रोजाना 20 से 25 लोग कुत्तों के काटने से जख्मी होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। हर साल रेबीज का इंजेक्शन लगवाने वालों में डेढ़ हजार मरीजों की बढ़ोतरी हो रही है। अजमेर में वर्ष 2021 में 5473 मामले कुत्तों के काटने के आए है। 2022 में कुत्तों के काटने के 6314 मामले हुए। वर्ष 2023 में 7834, 2024 में 8596 और इस साल जुलाई तक 5229 मामले कुत्तों के काटने से संबंधित थे जो जेएलएन अस्पताल में दर्ज किए गए। पिछले 3 साल में कुत्तों के काटने से दो लोगों की मौत भी हो गई।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR के सभी आवारा कुत्तों को 8 हफ्ते के भीतर सड़क से हटाने और उन्हें विशेष शेल्टर होम में भेजने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने हिदायत दी कि ये कुत्ते सड़कों पर वापस नहीं लौटने चाहिए।
उधर, राजस्थान हाई कोर्ट ने भी शहरी सड़कों से आवारा कुत्ते और पशु हटाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच आवारा कुत्तों के बच्चों पर हमले की खबर पर खुद ही नोटिस लेकर सुनवाई कर रही है।
कोर्ट ने इस काम में बाधा डालने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा, कोई व्यक्ति या संगठन बाधा बना तो अवमानना की कार्यवाही की जा सकती है। कोर्ट ने पशु एवं कुत्ते प्रेमियों को आड़े हाथों लेते हुए सवाल किया कि क्या वे रेबीज के शिकार बच्चों को वापस ला पाएंगे? बच्चों को किसी भी कीमत पर रेबीज नहीं होना चाहिए।
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