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राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सहयोग से रविवार को 15 दिवसीय ध्रुवपद प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।

जयपुर में रविवार को 15 दिवसीय ध्रुवपद प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इंटरनेशनल ध्रुवपद धाम ट्रस्ट की ओर से पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) और राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सहयोग से आयोजित क

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यह कार्यशाला 17 अगस्त से 1 सितम्बर 2025 तक रोजाना शाम 4 से 6 बजे तक होगी। उद्घाटन सत्र की विशेषज्ञ गुरु, विख्यात ध्रुवपद साधिका और पद्मश्री पं. लक्ष्मण भट्ट तैलंग की शिष्या, विदुषी प्रो. डॉ. मधु भट्ट तैलंग ने ध्रुवपद की ऐतिहासिक यात्रा, आध्यात्मिक स्वरूप और कलात्मक बारीकियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

प्रो. डॉ. मधु भट्ट तैलंग ने ध्रुवपद की ऐतिहासिक यात्रा, आध्यात्मिक स्वरूप और कलात्मक बारीकियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

प्रो. डॉ. मधु भट्ट तैलंग ने ध्रुवपद की ऐतिहासिक यात्रा, आध्यात्मिक स्वरूप और कलात्मक बारीकियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

ध्रुवपद में भारतीय परंपराओं की गहराई

उन्होंने सुर, ताल, गमक, मींड और छंद की बुनावट के साथ वेद-उपवेदों से निकली संस्कृत देववाणी का प्रायोगिक गायन प्रस्तुत किया। डॉ. मधु ने कहा कि भक्ति केवल ईश्वर के प्रति नहीं, धरती-माता के प्रति भी हो सकती है। ध्रुवपद हर युग में प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें योग, धर्म, दर्शन और भारतीय परंपराओं की गहराई समाहित है।

राष्ट्रप्रेम और नैतिकता का संदेश

डॉ. मधु ने बताया कि आज की शिक्षा में राष्ट्रप्रेम और नैतिक मूल्यों की कमी दिखाई देती है। इस कार्यशाला के माध्यम से युवाओं में देशभक्ति और संस्कार जगाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त, जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, माखनलाल चतुर्वेदी, निराला, शिवमंगल सिंह ‘सुमन’, रवींद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी की रचनाओं को ध्रुवपद के छंदों और रागों में प्रस्तुत कर एक अभिनव प्रयोग किया। यह प्रस्तुति संगीत के साथ-साथ धरती-माता के प्रति समर्पण का संदेश भी देती रही।

उन्होंने सुर, ताल, गमक, मींड और छंद की बुनावट के साथ वेद-उपवेदों से निकली संस्कृत देववाणी का प्रायोगिक गायन प्रस्तुत किया।

उन्होंने सुर, ताल, गमक, मींड और छंद की बुनावट के साथ वेद-उपवेदों से निकली संस्कृत देववाणी का प्रायोगिक गायन प्रस्तुत किया।

कार्यशाला में पखावज पर प्रतीश रावत, सारंगी पर उस्ताद अमरूद्दीन खां, तानपुरे पर किरण कौर और सहायक के रूप में डॉ. प्रदीप टाक ने संगत दी। मंच संचालन योगगुरु डॉ. नरेंद्र शर्मा ने किया। उपस्थित अतिथियों और श्रोताओं ने इसे परंपरा और नवाचार का अद्वितीय संगम बताया।

समारोह का शुभारंभ डॉ. के.एल. जैन (अध्यक्ष, राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज़), शिक्षाविद् प्रो. एन.एम. शर्मा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जयपुर प्रांत के सह-संघ चालक हेमन्त सेठिया ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया।



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