राजस्थान में अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पहले से ज्यादा सुरक्षित और जवाबदेह बनेगा। महिला और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 2.5 लाख पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) और इमरजेंसी पैनिक बटन लगाए जा र
यात्रियों की सुरक्षा, ओवरस्पीडिंग और इंश्योरेंस वैधता की ऑनलाइन निगरानी के लिए यह सिस्टम ERSS-112 से इंटीग्रेटेड है। यात्री बटन दबाते ही कंट्रोल सेंटर को अलर्ट मिलेगा और पुलिस की इमरजेंसी रिस्पॉन्स यूनिट तत्काल मौके पर पहुंचेगी। हाईवे पर स्पीड लिमिट तोड़ने या बीमा, टैक्स, परमिट जैसे दस्तावेज मान्य नहीं होने पर ऑटोमैटिक चालान कटेगा। राज्य के 145 टोल प्लाजा पर भी यह सिस्टम एक्टिव है, जिससे ट्रैकिंग और ई-चालान में कोई भी चूक नहीं रह पाएगी।
उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने सोमवार, 28 जुलाई को परिवहन भवन, जयपुर में VLTS कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का उद्घाटन किया। इस मौके पर ई-डिटेक्शन सिस्टम पोर्टल और हाइपोथेकेशन रिमूवल मॉड्यूल की भी शुरुआत की गई। शुरुआत में यह सिस्टम रोडवेज बसों में लागू किया गया है, जिसे आगे सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहनों में लागू किया जाएगा।

परिवहन भवन, जयपुर में VLTS कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का उद्घाटन किया गया।
2.5 लाख वाहनों में लगेगा डिवाइस
राज्य सरकार के मुताबिक करीब 2.5 लाख सार्वजनिक परिवहन वाहनों में यह ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन लगाया जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए केंद्र की निर्भया योजना के तहत NIC द्वारा बैकएंड और कंट्रोल सेंटर का सेटअप किया गया है। प्रेमचंद बैरवा ने बताया कि पहले चरण में यह सिस्टम रोडवेज की बसों में एक्टिवेट किया गया है। जल्द ही सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट में इसे लागू किया जाएगा। डिवाइस केवल उन निर्माताओं के होंगे जो केंद्रीय एजेंसियों से अप्रूव्ड हैं और राज्य के VLTD बैकएंड पोर्टल पर ऑनबोर्ड किए गए हैं।

GPS सेटेलाइट नेटवर्क से जुड़ा डिवाइस वाहन की सटीक लोकेशन तुरंत कंट्रोल सेंटर तक भेजेगा
सिस्टम की विशेषताएं
- रियल टाइम ट्रैकिंग : GPS सेटेलाइट नेटवर्क से जुड़ा डिवाइस वाहन की सटीक लोकेशन तुरंत कंट्रोल सेंटर तक भेजेगा।
- कंट्रोल और मॉनिटरिंग सेंटर : हर वाहन में लगे डिवाइस और इमरजेंसी बटन की स्थिति की नियमित जांच के लिए मॉनिटरिंग सेटअप होगा।
- ERSS से इंटीग्रेशन : इस सिस्टम को इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS) से जोड़ा गया है ताकि तत्काल सहायता मिल सके।
- एंड्रॉइड ऐप : यात्रियों और ऑपरेटरों के लिए मोबाइल ऐप भी होगा, जिससे रियल टाइम लोकेशन की जानकारी मिल सकेगी।
केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप पहल
उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने बताया- परियोजना को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार लागू किया गया है। मंत्रालय की ओर से 1 जनवरी 2019 से पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहनों में VLTD और इमरजेंसी बटन की अनिवार्यता घोषित की गई थी। इसके तहत सभी चार पहिया या अधिक सीटर सार्वजनिक सेवा वाहनों में यह सुविधा अनिवार्य है। हालांकि, ऑटो और ई-रिक्शा इससे बाहर रखे गए हैं। नियमों को सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में शामिल किया गया है (नियम 125H के अंतर्गत)।
प्रेमचंद बैरवा ने बताया- हर गाड़ी के अंदर एक इमरजेंसी बटन लगा रहेगा। जिसे किसी भी आपात स्थिति के समय यात्री के दबाते से ही परिवहन विभाग स्थित कंट्रोल सेंटर में अलर्ट आएगा। कंट्रोल सेंटर में मौजूद ट्रैकर इस सूचना को पुलिस विभाग के 112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स पर व्हीकल की रियल टाइम लोकेशन और लाइव लोकेशन शेयर करेगा। जिससे नजदीकी पुलिस व्हीकल सुरक्षा के लिए पहुंच सकेगी। ओवरस्पीडिंग पर व्हीकल का चालान इसी कंट्रोल सिस्टम से किया जा सकेगा। जैसे ही व्हीकल हाइवे पर स्पीड लिमिट को क्रॉस करेगा चालान कट जाएगा। व्हीकल का इंश्योरेंस है कि नहीं इन सबकी मॉनिटरिंग होगी। प्रदेश के 145 टोल प्लाजा पर रियल टाइम ट्रैकिंग डिवाइस भी इंस्टॉल किए गए हैं।

कैसे काम करता है VLTD सिस्टम?
कंट्रोल सेंटर के इंचार्ज डीटीओ दिलीप तिवाड़ी ने बताया- VLTD डिवाइस हर वाहन में लगाया गया AIS-140 सर्टिफाइड GPS आधारित ट्रैकिंग डिवाइस होता है, जो वाहन की लोकेशन को रियल टाइम में कंट्रोल सेंटर तक भेजता है।
पैनिक बटन दबाते ही मिलती है अलर्ट सूचना: हर वाहन में पैनिक बटन (Emergency Alert Button) लगाया गया है। जब भी कोई यात्री, विशेष रूप से महिला या बच्चा, खतरे की स्थिति में इस बटन को दबाता है: सबसे पहले यह अलर्ट VLTD डिवाइस से जुड़कर कंट्रोल सेंटर को भेजा जाता है। कंट्रोल सेंटर इस सूचना को तत्काल राज्य के इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS) यानी 112 पुलिस कंट्रोल रूम को फॉरवर्ड करता है।
अलर्ट के साथ वाहन की लाइव लोकेशन, वाहन नंबर, रूट, और ट्रैकिंग ID जैसे डेटा भी 112 सिस्टम को भेजे जाते हैं। इसके बाद नजदीकी पुलिस पेट्रोल यूनिट या सहायता टीम को मौके पर भेजा जाता है।
कंट्रोल सेंटर का संचालन: जयपुर स्थित परिवहन भवन में बने इस सेंटर में विशेष टीम 24×7 इन अलर्ट्स और वाहनों की निगरानी करती है।
सिस्टम की प्रमुख विशेषताएं
रियल टाइम मॉनिटरिंग: हर वाहन की लोकेशन सैटेलाइट के जरिए कंट्रोल सेंटर तक भेजी जाती है।
ERSS इंटीग्रेशन: सिस्टम को पुलिस विभाग के 112 नंबर से जोड़ा गया है, ताकि अलर्ट के तुरंत बाद सहायता पहुंचाई जा सके।
एंड्रॉइड मोबाइल ऐप: यात्रियों और ऑपरेटरों के लिए एक ऐप भी बनाया गया है, जिससे वे रूट, लोकेशन और अलर्ट देख सकें।
टेक्नोलॉजी-बेस्ड पारदर्शिता: सभी एक्टिव डिवाइस की स्थिति वाहन मालिक, ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट, और निर्माता कंपनी पोर्टल पर देख सकती है।
डिवाइस एक्टिवेशन सिस्टम: जिस डिवाइस को किसी वाहन में लगाया जाता है, उसका एक्टिवेशन VLTD पोर्टल से ही संभव है। वहीं से उसकी मॉनिटरिंग भी होती है।
किस-किस वाहन पर लगेगा डिवाइस?
केन्द्रीय मोटर यान नियम 125H के तहत निम्न वाहनों में यह डिवाइस लगाना अनिवार्य किया गया है:
1. स्टेज कैरिज और कांट्रेक्ट कैरिज (सभी यात्री बसें)
2. टैक्सी कैब और मैक्सी कैब
3. अन्य वाहन श्रेणियां जिन्हें राज्य/केंद्र सरकार अधिसूचित करे
दोपहिया, ऑटो, ई-रिक्शा जैसे छोटे वाहनों को इससे छूट दी गई है।
सिस्टम का तकनीकी आधार क्या है
AIS 140 :स्टैंडर्ड यह वही तकनीकी मानक है जिसे सड़क परिवहन मंत्रालय ने सुरक्षा के लिए तय किया है। डिवाइस उसी मानक के अनुरूप है।
बैकएंड सिस्टम: NIC के सहयोग से विकसित बैकएंड सर्वर, डिवाइस से डेटा लेकर कंट्रोल सेंटर तक पहुंचाता है। यहीं से पुलिस और अन्य एजेंसियों को सूचना फॉरवर्ड होती है।
अनुमोदित निर्माता :केवल उन्हीं कंपनियों के डिवाइस को उपयोग में लाया जा सकता है, जो केंद्र की जांच एजेंसियों से प्रमाणित और राज्य पोर्टल पर ऑनबोर्ड हों।
ई-डिटेक्शन सिस्टम की शुरुआत भी की गई
डिप्टी सीएम ने आज ई-डिटेक्शन सिस्टम पोर्टल का भी उद्घाटन किया। इस सिस्टम के माध्यम से राजस्थान के 145 टोल प्लाजा पर गुजरने वाले हर वाहन की डिजिटल निगरानी होगी। वाहन का बीमा, फिटनेस, टैक्स, परमिट या प्रदूषण प्रमाण पत्र वैध नहीं पाए जाने पर स्वतः चालान जारी हो जाएगा और वाहन मालिक को SMS से सूचना मिलेगी। इसके साथ ही अगर कोई वाहन हाइवे पर ओपरस्पीडिंग करता हुआ पाया जाता है तो उस व्हीकल में लगा डिवाइस ऑटोमैटिक उसका चालान कर देगा।
हाइपोथेकेशन रिमूवल मॉड्यूल से मिलेगा बड़ा फायदा
वाहन लोन चुकाने के बाद अब RTO जाकर हाइपोथेकेशन हटवाने की जरूरत नहीं। नया मॉड्यूल वाहन 4.0 पोर्टल में जोड़ा गया है। बैंक अब API के माध्यम से लोन समाप्त होने की NOC सीधे अपलोड करेंगे और पंजीयन अधिकारी उसी आधार पर रिकॉर्ड से हाइपोथेकेशन हटा सकेंगे। इससे फर्जी NOC और दलालों की भूमिका खत्म होगी।
सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह ट्रांसपोर्ट सिस्टम
राज्य सरकार का दावा है कि इस VLTD सिस्टम से पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुरक्षा, जवाबदेही और पारदर्शिता को नई ऊंचाई मिलेगी। खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए यह तकनीकी पहल एक मजबूत सुरक्षा कवच बनकर उभरेगी। यह सिस्टम आने वाले समय में सभी चार पहिया सार्वजनिक सेवा वाहनों में लागू किया जाएगा। वाहन मालिक भारत सरकार के अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर से यह डिवाइस लगवा सकेंगे।
विक्रेता पंजीकरण की प्रक्रिया
जो कंपनियां VLTD सिस्टम में भाग लेना चाहती हैं, उन्हें पहले यूनीक आईडी (UID) जनरेट करनी होगी। इसके लिए कंपनी लेटरहेड पर अधिकृत पत्र अपलोड करना होगा। UID मिलने के बाद ही ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। इसके साथ नीचे दिए गए दस्तावेज जरूरी होंगे:
1. वैध टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट (TAC)
2. वैध COP सर्टिफिकेट
3. कंपनी आईडेंटिफिकेशन नंबर
4. भरा हुआ आवेदन पत्र
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