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जयपुर की मुहाना थाना पुलिस ने शातिर वाहन चोर परशुराम मीणा को 11 चोरी की बाइक के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया कि वह पिछले एक साल में मुहाना थाना इलाके से 50 से अधिक नई बाइक चोरी कर चुका है। चोरी की नई बाइक के पार्ट्स को
आरोपी की गैंग में कई युवक काम करते हैं। जो ऑन डिमांड वाहन चोरी का काम किया करते हैं। ये लोग जयपुर के आसपास के जिलों में जाकर बाइक के पार्टस बेचा करते हैं।
डीसीपी साउथ राजर्षि राज वर्मा ने बताया- हनुमान कुम्हार पुत्र दुर्गालाल निवासी देवधाम कॉलोनी मदरामपुरा ने एक रिपोर्ट थाने में दी जिस में उस ने बताया कि उसकी बाइक 6 जनवरी 2025 को मांडिया फुट कम्पनी के बाहर खड़ी की थी। इसे थोड़ी देर बाद आकर देखा तो नहीं मिली पुलिस पर पुलिस टीम ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
गठित स्पेशल पुलिस टीम द्वारा थाना मुहाना इलाके में हो रही मोटरसाइकिल चोरी की वारदातों के घटनास्थलों पर जाकर सीसीटीवी के फुटेज देखे गए। इनका डाटा संकलन किया गया तथा सभी वारदातों में वाहन चोरी के आने जाने का रूट तैयार किया गया। पुलिस टीम ने वाहन चोरों के आने जाने के रूट व सीसीटीवी फुटेज से प्राप्त वाहन चोरों की फोटो को संभावित जिलों व वाहन चोरों के जिस क्षेत्र के होने का अंदेशा था। यहां के मुखबिरों को भेजी। इससे वाहन चोरों के अलग-अलग गैंग के बारे में जानकारी निकाली गई।
इस पर मुहाना थाना पुलिस ने बूंदी निवासी सुनील व मनोज को गिरफ्तार किया जिन से 15 बाइक रिकवर की गई। बदमाशों से हुई पूछताछ के बाद परशुराम मीना गैंग का मुखिया परसुराम मीना (22) पुत्र घासीराम मीना निवासी ग्राम पोस्ट जैल पुलिस थाना नगर फोर्ट जिला टॉक हाल किरायेदार सुरेश यादव का मकान कनको की ढाणी पुलिस थाना मुहाना जयपुर दक्षिण को गिरफ्तार किया आरोपी के कब्जे से चोरी की 11 बाइक रिकवर हुई।
तरिका वारदात
वाहन चोर परसुराम मीना अपने गांव से बस में बैठकर जयपुर आता था। इसमें कई बार वाहन चोरी गैंग के अन्य साथी साथ रहते थे। जो जयपुर आकर सांगानेर मानसरोवर व मुहाना क्षेत्र में घूमकर बाइक चुरा लेते थे। जितने लोग आते उतनी ही बाइक चुराकर ले जाते थे। बाइक चुराकर गांव की तरफ या जयपुर में ही कही छुपा देते थे। इसके बाद टोक बूंदी व अन्य ग्रामीण क्षेत्र के लोग जो चोरी की मोटरसाईकल खरीदने वाले ग्राहक मिलने पर उसे बाइक का मेक मॉडल बता देता।
दूसरी अन्य बाइक (जो किसी जानकार की होती लेकिन असली व बिना चोरी की होती है) की आरसी की फोटो स्टेट मंगवाकर गैंग के अन्य सदस्योंं के साथ मिलकर चोरी गई बाइक में असली बाइक (जो बिना चोरी की आरसी मंगवाते) के इंजन नंबर व चैसिस नम्बर खुदवाकर उसे बेच देते। इसका इंजन नम्बर, चैसिस नम्बर खुदवाते उसकी या तो डुप्लीकेट आरसी निकलवाकर ग्राहक को देते। रंगीन फोटो स्टेट आरसी की निकलवाकर चोरी की बाइक के साथ ग्राहक को दे देते थे।
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