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कोटा की कोर्ट ने एक साल पहले रेलवे स्टेशन से अपहृत चार साल के मासूम लविश केस में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए पांचों आरोपियों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
सेशन जज सत्यनारायण व्यास ने फैसला सुनाते हुए कहा कोई भी बच्चा अपने माता-पिता के जिगर का टुकड़ा होता है, उसे दासता में झोंकना घोर अपराध है।
दोषियों में शामिल हैं गिरोह का सरगना मुकेश मदारी, उसके दो भाई कर्ण और अर्जुन, मां लज्जो और पिता प्रेम। अदालत ने इन्हें न केवल 10-10 साल की सजा दी बल्कि अन्य धाराओं में 8-8 और 5-5 साल की सजा के साथ कुल 11 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया।
मामला 5 मई 2024 का है जब रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 से जालखेड़ा निवासी ओमप्रकाश के 4 साल के बेटे लविश का अपहरण हो गया था। जीआरपी की 15 टीमों ने कोटा से जयपुर तक 470 सीसीटीवी फुटेज खंगाले, और आखिरकार 10 दिन की लगातार खोज के बाद जयपुर में गिरोह को दबोच लिया गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि यह हरियाणा की मदारी गैंग बच्चों को अगवा कर जमूरा बनाकर भीख मंगवाने और काम करवाने का धंधा करती थी। लविश के साथ इनके पास से एक और 14 वर्षीय यूपी का बालक भी मिला।
तत्कालीन सीआई संतोष शर्मा ने बताया हम 10 दिन सड़कों पर रहे, हर कैमरा खंगाला, हर सुराग जोड़ा आखिर मासूम को बचा लिया।
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