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राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के.आर. श्रीराम और जस्टिस संदीप तनेजा की डिवीजन बेंच ने उदयपुर के ट्रस्ट की इनकम टैक्स छूट बहाली का आदेश दिया है।

राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के.आर. श्रीराम और जस्टिस संदीप तनेजा की डिवीजन बेंच ने उदयपुर के एक चेरिटेबल ट्रस्ट को बड़ी राहत देते हुए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को टैक्स छूट बहाली का आदेश दिया है। कोर्ट ने मानव सेवा समिति, उदयपुर के पक्ष में फैसला देत

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मामला मानव सेवा समिति, धर्मशाला परिसर हॉस्पिटल रोड, चेतक सर्कल, उदयपुर बनाम प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (एक्जेम्पशन्स), नई दिल्ली से संबंधित है। यह मामला असेसमेंट वर्ष 2018-2019 से जुड़ा हुआ है।

ऑडिट 115 दिन की देरी से, पोर्टल पर 700 दिन बाद अपलोड

याचिकाकर्ता राजस्थान पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट एक्ट, 1959 के तहत रजिस्टर्ड एक सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट है। ट्रस्ट का संचालन आनंदी लाल मेहता द्वारा किया जा रहा था, जो तब ट्रस्ट के अध्यक्ष थे। आनंदी लाल मेहता को गंभीर ब्रेन स्ट्रोक हुआ था। इसी कारण वे लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहे। उनकी खराब स्वास्थ्य स्थिति के कारण ट्रस्ट के असेसमेंट वर्ष 2018-2019 के खातों का ऑडिट 23 फरवरी 2019 को 115 दिन की देरी से हुआ। वहीं, ट्रस्ट के ऑडिटर ने फॉर्म 10बी को इनकम टैक्स ई-पोर्टल पर 20 सितंबर 2020 को अपलोड किया, जो निर्धारित तारीख से 700 दिन की देरी थी।

ट्रस्ट अध्यक्ष का निधन, देरी पर डिपार्टमेंट ने नहीं दी राहत

ट्रस्ट अध्यक्ष आनंदीलाल मेहता का 27 नवंबर 2022 को निधन हो गया। उनकी अनुपस्थिति में ट्रस्ट के दिन-प्रतिदिन के कार्य भी रुक गए। इसी के चलते अनावश्यक देरी हुई। इस स्थिति के कारण याचिकाकर्ता ट्रस्ट ने इनकम टैक्स एक्ट की धारा 119 के तहत आवेदन दिया, जिसे 17 अगस्त 2023 के आदेश द्वारा खारिज कर दिया गया था।

देरी माफी आवेदन खारिज करने को कोर्ट में चुनौती

पिटीशनर के वकील सिद्धार्थ रांका ने कोर्ट के सामने तर्क दिया कि पिटीशनर एक प्रामाणिक चैरिटेबल ट्रस्ट है। जो चैरिटेबल गतिविधियां चलाता है, गरीबों को भोजन वितरित करता है और मुफ्त एम्बुलेंस सुविधाएं भी प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि ये सभी गतिविधियां पिटीशनर के विभिन्न आय और व्यय खातों से आसानी से सत्यापित की जा सकती हैं। रांका ने यह भी कहा कि इनकम टैक्स विभाग ने लापरवाही से देरी माफी के आवेदन को खारिज कर दिया है।

अधिवक्ता ने तर्क दिया कि इनकम टैक्स विभाग द्वारा यह कहना कि अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष अध्यक्ष की सभी जिम्मेदारियों के लिए जिम्मेदार होगा, गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष का बीमार होना देरी माफी मांगने का एक प्रामाणिक कारण है।

कोर्ट का फैसला: देरी में दुर्भावना का आरोप नहीं

कोर्ट ने माना कि फॉर्म 10बी देर से फाइल करने और अपलोड करने में कोई दुर्भावना का आरोप नहीं लगाया गया है। कोर्ट ने यह भी माना कि पिटीशनर एक चैरिटेबल ट्रस्ट है, जिसे इनकम टैक्स विभाग द्वारा भी नकारा नहीं गया है। चैरिटेबल गतिविधियों को देखते हुए न्यायालय की राय में देरी माफी का आवेदन स्वीकार किया जाना चाहिए था।

कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में न्यायालयों ने बार-बार कहा है कि इस तरह का दृष्टिकोण न्यायसंगत, संतुलित और विवेकपूर्ण होना चाहिए। हालांकि तकनीकी और सख्त रूप से बोलते हुए इनकम टैक्स विभाग आवेदन को खारिज करने में न्यायसंगत हो सकता है, लेकिन एक सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट, जिसके पास इतने वर्षों की चैरिटेबल गतिविधियां हैं और जो अन्यथा इस तरह की छूट प्राप्त करने की शर्त को पूरा करता है, उसे केवल समय सीमा की बाधा के कारण इससे वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का संदर्भ

न्यायालय ने अपने फैसले के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट के अल जामिया मोहम्मदिया एजुकेशन सोसाइटी बनाम कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (एक्जेम्पशन्स) मुंबई मामले का हवाला दिया। इस फैसले में भी स्पष्ट रूप से कहा गया था कि चैरिटेबल ट्रस्टों के मामले में दृष्टिकोण न्यायसंगत, संतुलित और विवेकपूर्ण होना चाहिए। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि विधायिका ने संबंधित अधिकारियों को इस तरह की देरी को माफ करने की व्यापक विवेकाधीन शक्तियां प्रदान की हैं।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह समझ में नहीं आता कि कोई भी पार्टी, जो दावा करने का हकदार है, जानबूझकर आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने में देरी क्यों करेगा। कोर्ट ने माना कि पेटिशनर आलसी नहीं था या समय सीमा से परे दावा करने में सद्भावना की कमी नहीं थी।

अंततः कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए देरी को माफ कर दिया और 17 अगस्त 2023 के आदेश को रद्द करके पेटिशनर के आवेदन को स्वीकार करने का निर्देश दिया।



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