राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) में वेतन वृद्धि के लिए कई अधिकारियों ने जो डिग्री दी थी, वह फर्जी निकली। मामले में 6 साल से जांच जारी है। इस बीच भास्कर 41 अफसरों का नाम लाया है। किसी ने दो साल की डिग्री डेढ़ साल में ली तो किसी ने बिना छुट्टी लिए प्रैक्टिकल तक दे डाला। अधिकतर डिग्री उन यूनिवर्सिटी की हैं, जिनके पास राजस्थान में स्टडी कैम्पस खोलने की मंजूरी नहीं थी। सहकारी बैंकों के कर्मचारियों और सरकार में वर्ष 2012 में वेतन समझौता हुआ था। इसके मुताबिक, एमएससी (आईटी) की डिग्री वाले कर्मचारियों को दो वेतन वृद्धि अतिरिक्त मिलेगी। इधर, सहकारिता मंत्री गौतम दक का कहना है कि मामला जानकारी में आया है। कोई भी अधिकारी हो, कार्रवाई होगी।
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2 साल की डिग्री डेढ़ साल में ही पूरी कर ली
{यूजीसी रेगुलेशन 2003 के तहत निजी विवि राज्य से बाहर यूजीसी की अनुमति के बिना स्टडी सेंटर आफ कैम्पस सेंटर नहीं चला सकते हैं। इसके बाद भी बाहरी यूनिवर्सिटी ने डिग्री दी।
{कर्नाटक स्टेट ओपन यूनि. से 8 अधिकारियों ने डिग्री दी थी। हालांकि यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मार्कशीट दी थी, डिग्री दी ही नहीं।
{सबसे अधिक सिक्किम मणिपाल विवि से 2014 में जारी डिग्री पेश की गई। इसमें द्वितीय सेमेस्टर की मार्कशीट प्रथम सैमेस्टर से पहले की है।
{कुछ कर्मचारियों ने स्टडी के लिए 2012 में मंजूरी ली। उन्होंने दो साल के कोर्स की डिग्री डेढ़ साल में ही पेश कर दी, जो संभव नहीं है।
इनकी डिग्री अमान्य…पी.के.नाग, मनोज साहा, केडी शर्मा, कल्याण चौहान, ताराचंद, पी.एल.बैरवा, आर.पी. गावरिया, मूलचंद सुधार, अमरचंद मीणा, सुमित मीणा, सर्वेश चौधरी, मनीष गुप्ता, रूचि शर्मा, नेहा गुप्ता, अंकित अग्रवाल, महेन्द्रपाल, अविना शर्मा, अनिश कुमार, सुरेन्द्र राठौड़, अभिषेक रायजादा, सत्यनारायण, पीयूष जी. नारायण, रितेश जैन, शिवचरण गुर्जर, आर.के. राजोरिया, एसएल स्वामी, एसके पाटनी, केके मडिया, दिनेश बगड़ी, राजेन्द्र मीणा, हेमा मंगलानी, अमित शर्मा, गणेश नारायण मीणा, दीपक दामनिया, रवि कुमार, धर्म मीणा, मैना जैन, मुकेश सैनी, कृष्ण कुमार, हेमंत बालोतिया।
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