चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर एक ऐसा मकान है जो आज भी लोगों के लिए आस्था और जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है। इस मकान में भगवान गणेश और धन के देवता कुबेर की मूर्तियां एक साथ विराजमान हैं।
चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर एक ऐसा मकान है जो आज भी लोगों के लिए आस्था और जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है। इस मकान में भगवान गणेश और धन के देवता कुबेर की मूर्तियां एक साथ विराजमान हैं। यह बहुत ही दुर्लभ दृश्य है क्योंकि आमतौर पर गणेश जी की मूर्ति उनके दोनों प
250 साल पुरानी परंपरा, कच्चे मकान में स्थापित हुई थी मूर्तियां
सतीश सुखवाल (52 वर्ष) ने बताया कि यह मूर्तियां लगभग 200 से 250 साल पुरानी हैं और उनके पूर्वजों ने ही इन्हें स्थापित किया था। यह मूर्तियां शुरुआत में एक कच्चे मकान की दीवार में थीं। अब यह स्थान पक्का हो गया है, लेकिन मूर्तियां आज भी उसी स्थान पर मौजूद हैं। यह परंपरा उनके परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और पूरे श्रद्धा भाव से इनकी पूजा की जाती है।

गणेश जी की मूर्ति उनके दोनों पत्नियों रिद्धि और सिद्धि के साथ देखी जाती है, लेकिन यहां वे कुबेर जी के साथ विराजे हैं। इस दुर्लभ जोड़ी की मूर्तियां लगभग डेढ़ से दो फीट ऊंची हैं।
सतीश सुखवाल ने बताया कि हर वर्ष गणेश चतुर्थी पर यहां विशेष पूजा और श्रृंगार होता है। इस अवसर पर दीप जलाए जाते हैं, भोग चढ़ाया जाता है और परिवार के लोग ही भजन-कीर्तन होता है।
बुद्धि और धन का अनोखा संगम
भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान और सफलता का प्रतीक माना जाता है, जबकि कुबेर जी को धन, वैभव और समृद्धि का देवता कहा जाता है। दोनों देवताओं का एक साथ विराजमान होना बहुत ही शुभ संकेत माना जाता है। यह संगम इस बात को दर्शाता है कि जीवन में सफलता और समृद्धि दोनों का संतुलन होना जरूरी है।
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