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जिले के 110 स्कूलों के 241 कमरे जर्जर हालत में हैं। इन कमरों में छत से पानी टपकने, दीवारों में दरारें आने और सीलन की समस्या है।

चूरू जिले में सरकारी स्कूलों की इमारतों की स्थिति चिंताजनक है। जिले के 110 स्कूलों के 241 कमरे जर्जर हालत में हैं। इन कमरों में छत से पानी टपकने, दीवारों में दरारें आने और सीलन की समस्या है।

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जिले में छह स्कूल ऐसे भी हैं, जिनकी इमारतें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। सरकार और शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों के भवनों को पहले ही खाली करवा लिया है। इन स्कूलों के नए भवन निर्माण के लिए वित्तीय स्वीकृति भी मिल चुकी है।

शहर के बीच में स्थित राजकीय सर्वहितकारिणी पुत्री पाठशाला उच्च माध्यमिक स्कूल में 360 छात्राएं नामांकित हैं। इस स्कूल में पांच कमरे क्षतिग्रस्त हैं। जिनकी छत से बारिश के समय पानी टपकता है। इस समस्या के बारे में विभाग को लिखित में सूचित किया गया है।

डिप्टी प्रिंसिपल महावीर प्रसाद शर्मा ने बताया कि स्कूल में पहले पांच कमरे जर्जर थे। जिन्हें तोड़ दिया गया है। वर्तमान में कक्षा 9, 10, 11 और 12 जिन कमरों में चलती है, उनकी छत से पानी टपकता रहता है। विभाग से बजट न मिलने पर स्टाफ ने चंदा करके अस्थायी कमरों की मरम्मत करवाई है।

सीडीईओ गोविंद सिंह राठौड़ ने बताया कि गोगासर की महात्मा गांधी उमावि, सोनियासर की राउमावि, सुजानगढ़ धुलिया बास की महात्मा गांधी उमावि, राजगढ़ बेवड़ की राउमा संस्कृति स्कूल, गोठ्या की राउमावि और सिरसला की राउमावि के भवन खंडहर हो गए हैं। इन सभी के नए भवन निर्माण के लिए सरकार ने करोड़ों रुपए का बजट पास कर दिया है। गोगासर और सोनियासर स्कूल के लिए दो-दो करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत हो चुका है। इसके अलावा 110 स्कूलों में से 48 अधिक जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए भी बजट जारी कर दिया गया है।



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