राजस्थान एसओजी ने दिव्यांग का फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर कर नौकरी कर रहे 29 कर्मचारी-अधिकारियों का मेडिकल कराया। इस के लिए एसओजी ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज का एक मेडिकल बोर्ड बनवाया। जांच में सामने आया कि 29 में से 24 सरकारी कर्मचारी और अधिकारी फर्जी प्रामाण
एसओजी के एसपी ज्ञानचंद यादव ने बताया कि हैल्पलाइन पर एसओजी को सूचना मिली रही थी कि कुछ लोग दिव्यांग का फर्जी सर्टिफिकेट देकर सरकारी नौकरी पर लगे हुए हैं। शिकायत का सत्यापन करने के लिए एसओजी ने पहले अपनी टीम को मौके पर भेज कर सम्बंधिक अधिकारी और कर्मचारी पर नजर रखी। जिस के बाद एसएमएस मेडिकल कॉलेज से सम्पर्क कर एक बोर्ड बनाया गया। जिस पर एसओजी की टीम ने संदिग्ध 29 सरकारी कर्मचारी-अधिकारियों को एसओजी मुख्यालय बुलाकर उनकी जांच कराई। जांच में केवल 5 कर्मचारी सही पाये गए बाकी के 24 ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र देकर नौकरी ली।
एसओजी आने वाले दिनों में इन फर्जी प्रमाण पत्र देने वाले और सरकारी नौकरी प्राप्त करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई करेगी। एसओजी ने 24कर्मचारियों की जानकारी उनके विभाग के साथ साझा कर दी हैं। एसओजी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भवानी शंकर मीणा के नेतृत्व में इस मामले की जांच की चल रही हैं। मीणा ने मुख्यालय में मिल रही शिकायतों का सप्तापन के लिए एसएमएस मेडीकल कॉलेज के विभिन्न विषय विशेषज्ञों का बोर्ड गठित करवाकर दिव्यांग श्रेणी के लोक सेवकों का दोबारा से मेडिकल करवाया था। 5 लोक सेवकों की दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे अधिक होना पाया गया है और इनके अलावा 24 तथा कथित दिव्यांगों को मेडीकल बोर्ड ने दिव्यांग कैटेगरी के लिए अनफिट बताया है। श्रव्यबाधित 13 में से 13 लोक सेवक दिव्यांग कैटेगरी के लिए अनफिट पाये गये हैं। दृष्टिबाधित तथाकथित 8 दिव्यांगों में से 6 दिव्यांग कैटेगरी के नहीं पाये गये है। इसी प्रकार लोकोमोटर एवं अन्य प्रकार के दिव्यांगता वाले 8 लोक सेवकों में से 5 दिव्यांग कैटेगरी के लिए अनफिट पाये गये हैं।



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