![]()
अजमेर की पहाड़ियों से निकल कर कच्छ के रण में विलीन होने लूणी नदी में इस बार 50 दिन से पानी बह रहा है। गत दिनों अजमेर, नागौर, जोधपुर, पाली सहित कई इलाकों में हुई भारी बारिश के बाद लूणी उफान पर है। बाड़मेर जिले में गुड़ामालानी से लेकर बाखासर रण तक लूणी
इस नदी के किनारे हजारों किसानों की आबादी बसी हुई है और वो सालों से खेती बाड़ी कर रहे हैं। इतना ही नहीं लूणी उफान पर होने से गुड़ामालानी से लेकर बाखासर तक गांवों की संपर्क सड़कें, रपटें बंद हो चुकी है। रपट पर 5-8 फीट तक पानी बह रहा है। ऐसे में बाड़मेर-जालोर के करीब 200 से ज्यादा गांवों का 50 दिन से संपर्क कटा हुआ है। नदी क्षेत्र में बसे लोगों की ढाणियां पानी में डूबी हुई हैं।
कई पशुपालक तो अब भी नदी के बीच टापुओं पर फंसे हुए हैं। बाखासर इलाके में पिछले 2 दिनों में एसडीआरएफ और सेना की टीमों ने करीब दो दर्जन लोगों को सुरक्षित निकाला भी है। इसके अलावा कई लोग अब भी टापुओं पर मवेशियों को छोड़ कर बाहर नहीं आना चाहते हैं, ऐसे में टापुओं पर ही कच्चे छप्परों में मवेशियों का ध्यान रखते हुए जीवन बिता रहे हैं।
बाड़मेर: ये 100 गांव, यहां नदी के पार पंचायत तो कहीं स्कूल
गुड़ामालानी से बाखासर रण तक बाड़मेर जिले के नगर, डेडावास जागीर, रतनपुरा, नई उंदरी, जालीखेड़ा, अमलियाला, लूणवा जागीर, कुंडा, सीलू, गांधव खुर्द, गांवध कल्ला, बांटा, आलपुरा, डाबड़, डांगरिया, भाखरपुरा, गादेवी, आलपुरा, पनावली, आलेटी, माणकी, बछला, चल्काना, आैगाला, बोली, पनोरिया, खारी, तरला, गिड़ा, नवा पुरा, बावरवाला, तारीसरा, बाखासर समेत 100 गांव हैं। जहां लूणी नदी से गुजरने वाली संपर्क सड़कें, रपट और छोटे पुलिए बंद हो गए हैं। ऐसे में इन गांवों का लूणी नदी के दूसरे छोर की तरफ बसे गांवों और ढाणियों से संपर्क नहीं हो रहा है। कई गांव दूसरी तरफ है, कहीं बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। खेतों में फसलें पानी में डूबी हुई है।
जालोर: ये 100 गांव, जहां रास्ते बंद, ढाणियां व खेत डूबे
लूणी नदी के किनारे बसे जालोर के गोलिया, नवी बाली, जोधावास, हेमागुड़ा, झाब, चितलवाला, होती, हड़ेचा, कसूरी, खासर्वी, कसूरी, डूंगरी, अरवा, केरिया, वेड़िया, मालीपुरा, रतोड़ा, शिवपुरा, चिम्प्रा, पादरड़ी, टांपी, निंबाज, वावटा, सुजानपुरा, सूरचंद, सांकरिया, अहमद कोट, खेजड़याली, आकोरिया समेत सांचौर क्षेत्र के 100 से ज्यादा गांवों का लूणी नदी को पार कर दूसरे छोर जाने का संपर्क कटा हुआ है। लूणी नदी में गांधव से लेकर बाखासर तक करीब कहीं 8-10 तो कहीं 12-15 फीट तक पानी बह रहा है। यहां तक की उफान पर होने से करीब 100-200 मीटर तक पानी खेतों में पहुंच गया है। बाजरा, ग्वार की फसलें खराब हो गई।
खेजड़याली: पानी और दलदल को पार करते हैं लोग
कच्छ के रण से सटा खेजड़याली गांव। यहां आसपास पावटा, सूरचंद, सांकरिया, आकोरिया सहित कई गांव है, जो पिछले 50 दिन से पानी से घिरे हुए हैं। खेजड़याली गांव तो ऐसा है, जो दोनों और से लूणी नदी के पानी से घिरा हुआ है। दोनों रपट पर 4-4 फीट तक पानी बह रहा है। ऐसे में प्रशासन ने रपट काे बंद कर दिया है। 2-3 किमी. दूर से जो बच्चे स्कूल आते थे, वो अब रपट पार नहीं कर पा रहे हैं। इसी तरह जालोर का पावटा की ढाणियां पानी से घिरी हुई हैं। खेजड़याली में लोग लूणी नदी के बहाव क्षेत्र में ढाणियों में बैठे हैं, लेकिन घर से सड़क तक पहुंचने के लिए 2-3 फीट पानी से गुजरना पड़ता है।
Related
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments