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राज्य उपभोक्ता आयोग जोधपुर पीठ ने बिजली कनेक्शन देने में 1095 दिन की देरी करने के मामले में जोधपुर डिस्कॉम पर 2.19 रुपए का हर्जाना बाड़मेर के तीन उपभोक्ताओं को दिलाने के बाड़मेर जिला आयोग के फैसले को यथावत रखा है। राज्य आयोग के सदस्य निर्मल सिंह मेड़तव

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मामले की शुरुआत जनवरी 2018 में हुई थी, जब बायतु निवासी गिरधारी राम, राजेश और कुशलाराम तीन उपभोक्ताओं ने बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। लेकिन डिस्कॉम ने इन तीनों को 1095 दिन की देरी से कनेक्शन प्रदान किया, जो लगभग तीन साल की अवधि है।

हर दिन 1000 रुपए के हिसाब से हर्जाने की मांग

तीनों उपभोक्ताओं ने बाड़मेर जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 43(1) का हवाला देते हुए कार्रवाई की। इन्होंने प्रत्येक दिन की देरी पर 1000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से 1095 दिन के लिए कुल 8.48 लाख रुपए हर्जाना दिलाने की मांग की थी।

जिला उपभोक्ता आयोग बाड़मेर ने 1095 दिन की देरी को सेवा में त्रुटि मानते हुए प्रत्येक उपभोक्ता को 2.19 लाख रुपए का हर्जाना निर्धारित किया था। इसके साथ ही आयोग ने 5000 रुपए मानसिक हर्जाना और परिवाद व्यय स्वरूप 10 हजार रुपए देने के भी आदेश पारित किए थे।

डिस्कॉम ने की राज्य आयोग में अपील

जोधपुर डिस्कॉम बाड़मेर के एईएन ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील करते हुए कई तर्क दिए। डिस्कॉम अधिकारियों का कहना था कि उपभोक्ताओं को दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में शामिल कर नियमानुसार डिमांड नोट जारी किया गया था।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि उपभोक्ताओं को 30 दिन में कनेक्शन देने का कोई आश्वासन नहीं दिया गया था, बल्कि संसाधनों की उपलब्धता और वरीयता के अनुसार कनेक्शन जोड़ने की जानकारी दी गई थी। डिस्कॉम के अनुसार विद्युत कनेक्शन स्थापित करने के लिए मूल पत्रावली एईएन ऑफिस को भेज दी गई थी।

राज्य आयोग ने कहा- पहला निर्णय उचित

राज्य उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद सभी तथ्यों और परिस्थितियों का गहनता से अवलोकन किया। आयोग ने पाया कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 43(1) के अनुसार एक माह में कनेक्शन नहीं करने पर प्रतिदिन 1000 रुपये तक जुर्माना हो सकता है।

आयोग ने जोधपुर डिस्कॉम की अपील अस्वीकार करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग बाड़मेर के निर्णय को उचित ठहराया।

आयोग ने तीनों उपभोक्ताओं को प्रत्येक को 2.19 लाख रुपए हर्जाना, 5000 रुपए मानसिक हर्जाना और 10 हजार रुपए परिवाद व्यय मिलेगा।

मामले में डिस्कॉम की ओर से अधिवक्ता राजकुमार गहलोत और उपभोक्ताओं की ओर से अधिवक्ता राजेश भार्गव ने पैरवी की।



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