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राजस्थान में वाहनों की फिटनेस के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) खोले जा रहे हैं। इसे लेकर पूरे प्रदेश से परिवहन विभाग के पास 150 आवेदन आए हैं। आवेदन निर्धारित संख्या से अधिक मिले हैं। वही आवेदन प्रक्रिया में जमीनों की लीज डीड को लेकर गड़बड़ी भी
दरअसल एटीएस के लिए 2 जुलाई को जारी किए गए दिशा निर्देशों में यह साफ कहा गया था कि एटीएस के लिए 3500 वर्गमीटर भूमि होना अनिवार्य है। भूमि का मालिकाना हक नहीं होने की स्थिति में इसकी पंजीकृत लीज डीड करानी होगी।
अब इस पंजीकृत किरायानामा को लेकर विवाद सामने आ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि अधिकतर आवेदकों ने किरायानामा व्यावसायिक श्रेणी की बजाय आवासीय या औद्योगिक श्रेणी में पंजीकृत करवाया है, जो एटीएस के लिए मान्य नहीं है। क्योंकि परिवहन विभाग ने एटीएस को व्यावसायिक माना है, इसलिए एटीएस खोलने के लिए जमीन का पंजीकृत किरायानामा भी व्यावसायिक श्रेणी का होना चाहिए।
आवासीय और औद्योगिक किरायानामा लगा किए आवेदन
जयपुर शहर की बात करें तो यहां एक एटीएस खोलने के लिए पंजीकृत किरायानामे की फीस 80 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक हो सकती है, जबकि आवेदकों ने इसके लिए पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग में बहुत कम फीस चुकाई है। परिवहन अधिकारियों द्वारा इसे कर चोरी का मामला भी माना जा रहा है।
अब इस पूरे मामले में यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या परिवहन विभाग ऐसे आवेदनों को खारिज करेगा? या फिर इन्हें एक और मौका देते हुए आवेदन में सुधार का अवसर दिया जाएगा। वहीं कर चोरी के इस मामले में पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। गौरतलब है कि पूरे प्रदेश में 150 से अधिक आवेदकों ने एटीएस के लिए आवेदन किया है, ऐसे में पूरे मामले में 80 से 100 करोड़ रुपए की कर चोरी मानी जा रही है।
“इस तरह के कई आवेदन मिले हैं, जिनमें आवासीय और औद्योगिक किरायानामा लगाया गया है। इन्हें नोटिस जारी कर 7 दिन में सही आवेदन प्रस्तुत करने का मौका दिया जाएगा। अगर फिर भी सही दस्तावेज नहीं दिए जाएंगे, तो आवेदन निरस्त कर दिए जाएगा।” – ओ.पी. बुनकर, अपर परिवहन आयुक्त, परिवहन विभाग
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