![]()
अब तक जिन मरीजों का हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट हो चुका है और बाद में कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकन हो जाता था, उनके लिए ओपन सर्जरी ही एकमात्र विकल्प होता था, लेकिन अब एंजियोप्लास्टी थ्रू वॉल्व तकनीक से बिना सर्जरी के इलाज संभव हो गया है।
इसमें इंप्लांट किए गए वॉल्व के बीच से कैथेटर गुजारकर ब्लॉकेज वाली नस तक पहुंचाया जाता है और वहां स्टेंट डाला जाता है। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट व इंडिया वॉल्व्स 2025 के कोर्स डायरेक्टर डॉ. रविन्द्र सिंह राव ने बताया कि एऑर्टिक वॉल्व रिप्लेसमेंट (टावर) के बाद 10-15% मरीजों में कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज हो जाता है। ऐसे मामलों में यह तकनीक जीवनरक्षक साबित हो रही है।
तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में 1200 से अधिक विशेषज्ञ शामिल हुए। पहले दिन डॉ. अयुष खुराना ने नाविटर विजन पर, डॉ. सैबल कर ने माइट्राक्लिप पर और डॉ. विजय अव्यर ने साइंस बिहाइंड रेसिलिया विषय पर व्याख्यान दिया। वहीं, डॉ. निखिल जोशी और डॉ. साहिल खेड़ा ने नवीनतम वाल्व तकनीकों की जानकारी दी।
डॉ. राव ने कहा कि कोविड का हार्ट पर असर अब लगभग खत्म हो गया है, लेकिन नसों में प्लाक जमना आज भी खतरनाक है। महामारी के दौरान कम फिजिकल एक्टिविटी के कारण यह प्रक्रिया और तेज हुई। अचानक व्यायाम करने पर तेज रक्त प्रवाह से यह प्लाक फट सकता है, जिससे थक्का जमकर आर्टरी ब्लॉक हो जाती है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
इंक्लीसिरान से तेजी से कम होता है कोलेस्ट्रॉल, दिल्ली के पद्मश्री हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण चंद्रा ने बताया कि अब इंक्लीसिरान नामक नई दवा से कोलेस्ट्रॉल को तेजी से कम किया जा सकता है। यह इंजेक्शन के रूप में दी जाती है और केवल छह महीने तक असरदार रहती है। इससे कोलेस्ट्रॉल का स्तर 50% तक घटाया जा सकता है।
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments