धरियावद रेंज के गांव में एक अजगर खेत में घुस गया था। जिसको सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया।
धरियावद रेंज के अंतर्गत आने वाले चित्तौड़िया गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब एक किसान के खेत में 12 फीट लंबा और लगभग 70 किलो वजनी अजगर घुस आया। यह अजगर किसान भगवानिया के खेत में देखा गया। अजगर को देख कर किसान बुरी तरह घबरा गया और तुरंत आसपास के ग्रा
घटना की जानकारी मिलते ही गांव के कई लोग मौके पर इकट्ठा हो गए। अजगर को खेत में देखने के बाद लोगों में डर का माहौल बन गया। किसी अनहोनी की आशंका के चलते ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचित किया। सूचना मिलते ही धरियावद रेंज के रेंजर प्रशांत शर्मा अपनी रेस्क्यू टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

वन विभाग की टीम ने किया अजगर का रेस्क्यू।
कुंडली बनाकर बैठा था अजगर
जब वन विभाग की टीम खेत पर पहुंची, तो उन्होंने देखा कि खेत में एक नाला जैसी संरचना बनी हुई थी और उसके पास की झाड़ियों में अजगर कुंडली मारकर बैठा हुआ था। रेंजर प्रशांत शर्मा ने बताया कि अजगर का इस तरह कुंडली बनाकर बैठना इस बात का संकेत है कि वह अटैकिंग यानी हमले की स्थिति में था। ऐसे समय में अजगर को पकड़ना काफी खतरनाक और चुनौतीपूर्ण होता है। ऊपर से अजगर झाड़ियों में छिपा हुआ था, जिससे स्थिति और मुश्किल हो गई।

अजगर को सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया।
लगभग 40 मिनट में किया रेस्क्यू
टीम ने सबसे पहले अजगर के आसपास की झाड़ियां काटीं ताकि जगह साफ हो सके और अजगर को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित निकाला जा सके। यह प्रक्रिया बहुत सावधानी से की गई, क्योंकि अजगर किसी भी समय हमला कर सकता था। करीब 40 मिनट की मेहनत के बाद रेस्क्यू टीम ने अजगर को सुरक्षित रूप से पकड़ लिया। इस अभियान में वन विभाग की छह सदस्यीय टीम शामिल थी, जिन्होंने पूरी सतर्कता और अनुभव के साथ यह रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा किया।

12 फीट अजगर को पकड़ने में 40 मिनट का समय लगा।
पानी के तेज बहाव से बहकर आया था अजगर
रेंजर प्रशांत शर्मा ने बताया कि इन दिनों बारिश का मौसम चल रहा है। इस कारण नालों में तेज पानी बहता है और अक्सर जंगली जानवर बहकर गांवों की ओर आ जाते हैं। यही कारण है कि यह अजगर भी अपने प्राकृतिक आवास से बहकर खेत तक पहुंच गया था। बारिश के मौसम में अक्सर इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं, जब सांप, अजगर, नेवला या अन्य छोटे-बड़े वन्य जीव इंसानी बस्तियों की ओर आ जाते हैं।
रेस्क्यू के बाद अजगर को वन विभाग की टीम सीतामाता सेंचुरी ले गई, जहां उसे सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया। सीता माता सेंचुरी इस क्षेत्र का एक संरक्षित वन क्षेत्र है, जहां ऐसे वन्य जीवों को सुरक्षित रखा जाता है।
रेंजर ने की लोगों सीपीएल, बोले – जानवरों को ना करे तंग
रेंजर शर्मा ने भी लोगों से अपील की है कि अगर इस तरह के जंगली जीव दिखाई दें, तो उन्हें तंग न करें और न ही मारें। ऐसे जानवर खतरे में होने पर हमला कर सकते हैं, जिससे जान-माल का नुकसान हो सकता है। साथ ही, वन्य जीवों को मारना कानूनन अपराध भी है। वन विभाग की टीम ऐसे मामलों में प्रशिक्षित होती है और वे जानवरों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का काम करती है।
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