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राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में सरकारी स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई और 20 गंभीर घायल हो गए। हादसे में 35 बच्चे मलबे में दब गए थे। हादसे को लेकर शिक्षा विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्कूल की हेड मास्टर समेत 5 टीचर को सस्पेंड कर दिया था। अगले ही दिन पीड़ित परिजनों ने भी स्कूल स्टाफ को घटना का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ दांगीपुरा थाने में मामला दर्ज करा दिया। ग्रामीणों के आरोप है कि हादसे से पहले छत कंकर गिर रहे थे, लेकिन स्टाफ ने ध्यान नहीं दिया। बच्चों ने बताया तो उसे भी अनसुना कर दिया। आरोप है कि हादसा हुआ तब स्टाफ बाहर नाश्ता कर रहा था। हादसे के बाद से ही स्कूल स्टाफ गायब था। दैनिक भास्कर स्कूल की हेड मास्टर मीना गर्ग सहित सभी पांच टीचर के पास पहुंचा और सीधे सवाल किए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… भास्कर रिपोर्टर सबसे पहले निलंबित हेड मास्टर मीना गर्ग के पास पहुंचा। मीना गर्ग ने बताया- मैं घटना वाले दिन सुबह 7.30 बजे स्कूल पहुंची थी। स्टाफ के दो और टीचर भी आ गए थे। हमने स्कूल के ताले खोले। इस दौरान वहां बारिश हो रही थी। स्कूल परिसर के मैदान और बरामदे में पानी जमा हुआ था। ऐसे में जिस कमरे में हम हमेशा प्रार्थना करवाते थे, उसी कमरे में बच्चों को एकत्रित किया। इस दौरान भी कई बच्चे बाहर खेल रहे थे। दोनों टीचर उन्हें क्लास में बुलाने के लिए बाहर गए थे। मैं आठवीं कक्षा में बैठी बच्चियों को बुलाने दूसरे कमरे में गई हुई थी। इसी दौरान हादसा हो गया। इसके बाद क्या हुआ और कैसे हुआ, मैं कुछ भी नहीं कह सकती। मुझे इस स्कूल में पढ़ाते हुए 9 साल हो गए। मेरे पढ़ाए कई बच्चो की शादियां भी हो गई। (रोते हुए) मुझे इस हादसे में मरने वाले और घायल होने वाले हर एक बच्चे का चेहरा याद आता है। बिल्डिंग क्यों गिरी, इसका हमारे पास तो कोई रीजन नहीं है। अगर हमें कुछ पता होता तो हम सूचना भी तो प्रेषित करते। किसी दूसरे स्टाफ को भी कभी ऐसा नहीं लगा। ये हमारे लिए अनएक्सपेक्टेड सा था।करीब दो साल पहले स्थानीय ग्राम पंचायत मनपसर ने इस बिल्डिंग की छत की मरम्मत कार्य भी करवाया था। मैंने ही खोला था स्कूल का ताला : जावेद अहमद इसके बाद रिपोर्टर स्कूल के दूसरे निलंबित टीचर जावेद अहमद से मिला। उन्होंने बताया- उस दिन सुबह 7:30 बजे मैंने ही स्कूल का ताला खोला था। बच्चे प्रार्थना के लिए कमरे में आने लगे थे। इस दौरान दूसरी क्लासों के बच्चे अपने-अपने कमरों में बेग रखने के लिए चले गए थे। मैं ही उस कमरे में सबसे पहले गया था, जहां बाद में हादसा हुआ था। जब मैं वहां गया और आधे ही बच्चे देखे तो, मैंने मौजूद बच्चों से पूछा-इतने ही कैसे हो ? बाकी के बच्चे कहां हैं? इस पर बच्चों ने बताया कि कुछ बच्चे ग्राउंड में हैं और कुछ अपनी-अपनी क्लास में हैं। इस पर मैं कमरे से बाहर आया और कुछ ही सेकेंड में हादसा हो गया। बच्चों को बाहर निकलने का समय ही नहीं मिला। शायद कुछ सेकेंड का समय मिलता तो बच्चे बाहर आ जाते। जैसे ही वो छत गिरी मैं वापस उधर दौड़ा। मैंने ग्रामीणों के आने से पहले ही 3-4 बच्चो को बाहर निकाल लिया था। मैं अकेला ये ही कर पाया था। इधर तब तक मैडम ने ग्रामीणों को भी मदद के लिए वहां बुला लिया था। सुबह साढ़े 11 बजे तक हम सब वहीं स्कूल परिसर में ही बच्चों का रेस्क्यू करते रहे। इसके बाद पुलिस हमें प्रोटेक्शन के साथ थाने ले गई थी। सुबह 7:30 बजे स्कूल खुला और 7:40 के आस पास हादसा हो गया। जिस कमरे में ये हादसा हुआ, वो स्कूल का सबसे सेफ कमरा था। तीन दिन की बारिश के बाद भी कभी वहां पानी नहीं टपका था। स्कूल के सभी कार्यक्रम भी हम उसी कमरे में आयोजित करते थे। मेरी रेगुलर क्लास ही इसी कमरे में लगती थी। वहां क्लास 6 और 7 के बच्चे बैठते थे। (रोते हुए) क्लास में सबसे पहले वहीं बच्चे पहुंचते है जो सबसे पंक्चुअल और क्रीम होते हैं। उस दिन भी तब तक वहीं बच्चे आए थे। वो रेगुलर क्लास में आते थे। उनके जाने का मुझे बहुत दुःख हो रहा है। 6 साल से मैं वहां पढ़ा रहा था। न दीवारों में सीलन, न प्लस्तर उखड़ा हुआ था : बद्रीलाल लोढ़ा तीसरे निलंबित टीचर बद्रीलाल लोढ़ा ने बताया कि हादसे वाले दिन मैं वहां नहीं था। उस दिन मैं क्लस्टर कार्यशाला के चलते पास के ही कामाखेड़ा स्कूल में था। वहीं मेरे पास प्रधानाचार्य मीना मैडम का फाेन आया था। उन्होंने ही मुझे हादसे की जानकारी दी थी। इसके बाद मैं क्लस्टर कार्यशाला छोड़ तत्काल स्कूल पहुंचा। सुबह 8:45 बजे के आस-पास मैं वहां पहुंच गया था। मेरी भी सर्विस इस स्कूल में बहुत लंबी है। घटना वाले दिन मैं वहां था ही नहीं : कन्हैयालाल सुमन चौथे निलंबित टीचर कन्हैयालाल सुमन ने बताया कि मेरा 11 जुलाई को ही व्यवस्थार्थ इस स्कूल से ट्रांसफर कर दिया गया था। शिक्षण कार्य की आवश्यकता को देखते हुए नजदीक की ही दूसरी मनपसर स्कूल में लगा दिया गया था। इसके बाद से में वहां सेवा दे रहे थे। अब तो किसी भी बच्चे को स्कूल ड्रेस में देखता हूं तो लगता है कि हमारे बच्चे …(रोने लग गए) इसके बाद कुछ भी नहीं बोल पाए। पांचवें निलंबित टीचर रामविलास लववंशी ने भी लगभग वहीं बातें दोहराई जो बाकी टीचर बोल रहे थे। सवाल : दो साल पहले मरम्मत, फिर कैसे गिर गई छत पड़ताल में सामने आया कि जिस कमरे में हादसा हुई उसकी छत की मरम्मत दो साल पहले ही मनपसर ग्राम पंचायत ने करवाई थी। ऐसे में भास्कर रिपोर्टर झालावाड़ जिला परिषद के सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) प्रभुदयाल मीणा के पास पहुंचा। उन्होंने बताया- ये सच है कि ढाई साल पहले छत की मरम्मत के लिए 1 लाख रुपए स्वीकृत हुए थे। वो काम हुआ भी था। इस पर भास्कर ने सवाल किया- जांच कैसे करेंगे, वहां तो बुलडोजर चला दिया है? इस पर मीणा बोले, अब छत की क्या जांच करेंगे। बाकी जो भी कारण रहे है, उसका हम एनालिसिस कर रहे हैं। झालावाड़ स्कूल हादसे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी सहित कई सस्पेंड झालावाड़ हादसे के मामले में शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के निर्देश पर शासन सचिव शिक्षा कृष्ण कुणाल ने झालावाड़ के प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी श्रीमती नरसो मीणा सहित मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार बालासोरिया, पूर्व मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी चंद्र शेखर लुहार, मनोहर थाना पंचायत प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी मनपसर प्रभुलाल कारपेंटर, समग्र शिक्षा के सहायक अभियंता झालावाड़ तथा तत्कालीन प्रारंभिक पंचायत शिक्षा अधिकारी राधेश्याम मीणा को जांच विचाराधीन रखते हुए सस्पेंड कर दिया है। वहीं मनोहर थाना के कनिष्ठ अभियंता जो संविदा पर कार्यरत है की संविदा समाप्त करने के आदेश जारी किए हैं। हादसे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… शिक्षामंत्रीजी! स्कूल कैसे बना श्मशान, 7 बच्चों का हत्यारा कौन?:बुलडोजर से मिटाए जानलेवा लापरवाही के सबूत, सरकारी सिस्टम के घड़ियाली आंसू जिन पत्थरों में 7 मासूमों की चीखें दब गईं:हालात देख भास्कर रिपोर्टर भी नि:शब्द हो गया, देखिए VIDEO राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल बिल्डिंग गिरी,7 बच्चों की मौत:9 की हालत गंभीर; 5 टीचर सस्पेंड; शिक्षा मंत्री बोले- जिम्मेदार तो मैं ही हूं झालावाड़ स्कूल हादसा, ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों पर किया पथराव:वसुंधरा राजे के पहुंचने से पहले नरेश मीणा को लिया हिरासत में; पुलिस ने किया लाठीचार्ज स्कूल की मरम्मत के लिए गांववालों से मांगे थे रुपए:4 साल से जर्जर थी बिल्डिंग, किसी ने नहीं सुना; 7 मौतों का जिम्मेदार कौन
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