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विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के केंद्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि राजस्थान सरकार ने अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए प्रभावी कानून बनाया है। उन्होंने अपनी आत्मा की आवाज सुनी है। वे सोमवार को नागौर में विश्व हिंदू परिषद की प्रबुद्धजन संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के तौर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा- 2026 में शुरू होने वाली जनगणना को लेकर पूरे हिंदू समाज से यही आह्वान है कि अपने वर्ग का अभिमान ना करें। जनगणना के कॉलम को देखते हुए यही सोच रखनी है कि हिंदू हैं, हिंदू रहेंगे और हिंदू लिखवाएंगे। हिंदू धर्म के समाजों में जो भी भ्रम फैलाया जा रहा है, उसको रोकेंगे। 5 साल में गांव के गांव वापस हिंदू धर्म में लौटेंगे
उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि विहिप ने धर्मांतरण और लव जिहाद रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए। हम घर वापसी के लिए भी योजना बना रहे हैं। उस योजना का लाभ हो रहा है, बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों के धर्म की ओर लौट रहे हैं। आने वाले 5 साल में गांव के गांव और पूरे मोहल्ले के मोहल्ले वापस हिंदू धर्म में लौटने लगेंगे। उन्होंने कहा- बच्चों को केवल सुविधाएं देना ही पर्याप्त नहीं है, उन्हें हिंदू संस्कार भी देने जरूरी है। हमने कहा है कि प्रत्येक हिंदू के घर में 2 या 3 बच्चे होने चाहिए। विवाह की उम्र सीमा तय होनी चाहिए। विहिप का सभी मुसलमानों से कहना है कि तुम सभी हिंदू थे, 2-4-5 पीढ़ी पहले, तो आओ… ना तुम धोखे से करो, ना हम धोखे से करेंगे। हम लालच, भय और धोखे से किए जा रहे धर्मांतरण को रोकने का काम कर रहे हैं। कोई अपनी मर्जी से ईसाई या मुसलमान बनता है तो संविधान इसकी इजाजत देता है। जो आदिवासी खुद को हिंदू नहीं मान रहे, उसके पीछे षड़यंत्र
भारत आदिवासी पार्टी से जुड़े सवाल पर आलोक कुमार ने कहा कि जो लोग आदिवासी होकर भी खुद को हिंदू मानने को तैयार नहीं, उनके पीछे एक षड़यंत्र है। कुछ इस्लामिक शक्तियां, नक्सलवादी और वेस्टर्न यूरोपियन मार्केट के लोग हिंदू समाज को सब तरफ से तोड़ने का और बांटने का षड़यंत्र कर रहे हैं। आपने जिसका नाम लिया(बीएपी) वो भी यही लोग हैं। उन्होंने कहा- वो लोग अपना भ्रम फैलाने की कोशिश करेंगे और हम लोग अपना सत्य फैलाने की कोशिश करेंगे। हम जरूर सफल होंगे। वो भी हमारी तरह प्रकृति प्रेमी हैं। वो इससे क्यों असहमत हैं, हम और वो (आदिवासी) प्रकृति की पूजा करते हैं। हम उन्हें ये समझा रहे हैं कि प्रकृति के पांचों तत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश की पूजा करते हैं। ये हमारे पुण्य का कारण हैं, हम उनको जाकर समझाएंगे तो काफी लोग समझ रहे हैं, बाकी भी समझ जाएंगे। धर्मांतरण किसी के खिलाफ नहीं, हिंदुओं का जगााने का काम
1974 से देश में जातीय भेद मिटाने का काम चल रहा है, इसलिए आज इतनी समरसता हुई है। हम रेस्टारेंट में कुछ खाने जाते हैं तो ये नहीं देखते कि कौन पास में बैठा है? 40 करोड़ लोग एकसाथ कुंभ में पहुंचे, वहां कोई भेदभाव नहीं दिखा। यहीं सामाजिक समरसता का उदाहरण है। हम बहुत आगे बढ़े हैं। विहिप ने बहुत बड़े लेवल पर धर्मांतरण को रोका है। धर्मांतरण रोकना मुस्लिम और ईसाई समाज के खिलाफ नहीं, ये हिंदुओं का जगाने के लिए है। जातिगत जनगणना नहीं होती तो भी ठीक था। अब जातिगत जनगणना हो रही है तो हम इस पर टिप्पणी नहीं करेंगे। सभी भाषाएं अपनी भाषाएं हैं। मराठी भी उतनी ही अपनी भाषा है, जितनी कि हिंदी। कुछ राजनीतिक लोग अपने स्वार्थ के लिए ऐसे मुद्दे उठाते रहते हैं, लेकिन समय के साथ लोग अब समझने लगे हैं। संगोष्ठी में विहिप, बजरंग दल, मातृ शक्ति और दुर्गा वाहिनी के सदस्य शामिल हुए। अध्यक्षता सुरेश राठी ने की। डॉ. अंबेडकर शिक्षा समिति रैगर समाज नागौर के अध्यक्ष बिड़दीचंद मोहनपुरिया भी मंचस्थ थे।
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