सियासत में कुछ भी लंबे समय तक छिपा पाना संभव नहीं रहता। एक के पीछे कई आंखें लगी रहती हैं। नेताओं के सात समंदर पार के किस्से भी सामने आ जाते हैं। पिछले कई दिनों से सियासत में दुबई की मशहूर बुर्ज खलीफा के बगल वाली बिल्डिंग की चर्चा हो रही है।
विपक्षी पार्टी के एक बड़े नेताजी के नजदीकी और एक पूर्व मंत्री के यहां करोड़ों का पेंट हाउस खरीदने की चर्चाएं जोरों पर हैं। इनका कनेक्शन एक बड़े कारोबारी से बताया जा रहा है। सियासी गलियारों में अब पेंट हाउस के किस्से के पीछे कई किरदार बताए जा रहे हैं।
पावरफुल कमेटी की बैठक में लगी अफसरों को फटकार पिछले दिनों विधानसभा की सबसे पावरफुल कमेटी की बैठक में ‘एक सबके लिए सब एक के लिए’ स्लोगन वाले विभाग के अफसरों की खूब क्लास लगी। महकमे के खिलाफ गड़बड़-घोटालों के दस्तावेजी सबूत दिखाए गए।
बैठक के दौरान इन्हीं सबूतों को आधार बनाकर अफसरों को खरी खोटी सुनाई गई। अफसरों के पास कई मामलों में जवाब तक नहीं था। पिछले दिनों केंद्र वाले मंत्री इसी महकमे की तारीफ करके गए थे, लेकिन मामला जब कागजों पर आ जाए तो कोई क्या कर सकता है?
सत्ताधारी नेताजी की शिकायत लेकर आने वाले को मंत्री ने बैरंग लौटाया पिछले दिनों चर्चित मंत्रीजी के पास एक फरियादी उनकी ही पार्टी के नेताजी की शिकायत लेकर पहुंचा। फरियादी का दर्द यह था कि सत्ताधारी दल के नेताजी को सेवा शुल्क देने के बावजूद उनका काम नहीं हुआ। फरियादी भी कम नहीं था। उसे नियमों के खिलाफ मकान बनाना था।
नेताजी मदद नहीं कर पाए और नियमों के खिलाफ बनने वाला मकान सील हो गया। मंत्री ने भी फरियादी को यह कहते हुए बैरंग लौटा दिया कि गैर कानूनी काम करने के लिए नेताजी को सेवा शुल्क क्यों दिया? मकान तो टूटना ही चाहिए था। अब खुद की पार्टी के नेताजी का मंत्री कुछ कर भी नहीं सकते थे, इसलिए फरियादी को बैरंग लौटाने के अलावा चारा भी तो नहीं था।

बड़े नेता के बॉडीगार्ड पर क्यों भड़के फायरब्रांड विधायक? पिछले दिनों विपक्षी पार्टी ने राजधानी में पैदल मार्च निकाला। अब हाईकमान के आदेश पर पैदल मार्च था तो बड़े नेता और विधायक भी जुटे। पैदल मार्च के दौरान बड़े नेताओं की सुरक्षा में लगे कमांडोज ने घेरा बना लिया।
एक विधायक को सुरक्षाकर्मी ने कई बार कोहनी मार दी। इससे विधायक भड़क गए और वहीं खरी-खोटी सुनाने लगे। बॉडीगार्ड की बॉडी तक हाथ पहुंच गए। विधायक ने बड़े नेताजी के लिए भी तल्ख लहजा दिखाते हुए यहां तक कह दिया कि जब इतना ही खतरा है तो आते ही क्यों हैं? विधायक इस कदर नाराज थे कि सुरक्षाकर्मी पर हाथ छोड़ने वाले थे। एक युवा विधायक और पूर्व विधायक ने बीच बचाव कर माला शांत करवाया।
बड़े नेताओं की नजरें तो गईं लेकिन देखकर भी अनजान बने रहे। विधायक पहले मंत्री रह चुके हैं और पूर्व मुखिया के खेमे के हैं। सुरक्षाकर्मी पूर्व संगठन मुखिया का था। अब इस घटना को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं।

चर्चित आईपीएस का लेटर बम, निशाने पर एक अफसर अपने बयानों और चिट्ठियों से चर्चा में रहने वाले आईपीएस ने हाल ही में खानपान की सुरक्षा देखने वाली अथॉरिटी के अफसर को एक लेटर लिखा। लेटर में एक स्टेट सर्विस के अफसर के खिलाफ लंबे चौड़े आरोप लगाते हुए कार्रवाई करने का मुद्दा उठाया है।
मंत्री के निर्देश और छापेमारी का हवाला देते हुए भूमिका बनाई है। आईपीएस कम्युनिटी पुलिस में हैं, इसलिए लिखने का तर्क भी इसी को बनाया है। अब इस लेटर के पीछे के निहितार्थ ढूंढे जा रहे हैं, क्योंकि अफसर एक-दूसरे के खिलाफ कम ही इस तरह के लेटर लिखते हैं।
एक पार्टी दो कार्यक्रम के पीछे कौनसा सियासी एजेंडा? सियासत के भी कई रंग और छिपे हुए रूप हैं, जिसे हर कोई नहीं समझ पाता। पिछले दिनों सत्ताधारी पार्टी ने भारत विभाजन पर बड़ा आयोजन रखा। प्रदेश के मुखिया से लेकर तमाम बड़े नेता शामिल हुए। इसी समय शहरी सरकार के मुखिया ने भी उसी थीम पर अलग कार्यक्रम रख दिया।
अब पार्टी का प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम हो तो सामान्यतया उसके पैरेलल कार्यक्रम उस दिन तो नहीं रखा जाता, क्योंकि हाथी के पांव में सबका पांव वाली थीम चलती है। शहरी सरकार की मुखिया के पैरेलल कार्यक्रम की सत्ताधारी पार्टी में खूब चर्चाएं हो रही हैं। सब इसके पीछे के कारण को तलाश रहे हैं। राजनीति में कोई इतना भी कच्चा नहीं होता कि ऐसे पैरेलल कार्यक्रम रख दे, इसका रहस्य जल्द ही बाहर आएगा।
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किस आईएएस को मिली चार्जशीट?:सत्ताधारी नेता भिड़े, एक दूसरे पर गालियों की बौछार, मंत्री नहीं लगवा पाए पसंद का कलेक्टर
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