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राजस्थान में हेल्थ डिपार्टमेंट का सूचना तंत्र बीमार हो गया है। जिलों में तैनात मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (PMO) के खिलाफ लगातार आमजन या दूसरे स्तर से लापरवाही या अन्य गड़बड़ी की शिकायतें आ रही हैं। लेकिन विभ
मजबूरन लोगों को जब कलेक्ट्रेट जाकर शिकायत करनी पड़ रही है। उसके लिए कलेक्टर, एडीएम, एसडीएम के स्तर पर जांच करवाई जा रही है। उस पर कार्यवाही के लिए फाइल भेजकर अनुशंषा की जा रही है।
विभाग के इस बीमार सूचना तंत्र से अब हेल्थ डिपार्टमेंट के आला-अफसर खफा हो गए हैं। पिछले दिनों ज्वाइंट सेक्रेट्री के स्तर से एक पत्र निदेशक हेल्थ को लिखा गया और इस पर नाराजगी जताई। सचिव ने पत्र में बताया- हमारे पर ज्यादातर CMHO और PMO के खिलाफ कार्रवाई के लिए उपखंड अधिकारी, अतिरिक्त कलेक्टर के जरिए कलेक्टर के स्तर से फाइल भेजकर अनुशंषा करवाई जा रही है। जबकि इन स्तर के डॉक्टरों (CMHO, PMO) के खिलाफ शिकायत सुनने और उस पर कार्यवाही के लिए जोन लेवल पर संयुक्त निदेशक और निदेशालय स्तर पर अतिरिक्त निदेशक है।
पत्र में सचिव ने चेतावनी देते हुए कहा, कि जल्द विभाग के सूचना तंत्र को मजबूत किया जाए और आमजन की शिकायतों को विभाग के स्तर पर दर्ज करके उन पर नियमानुसार कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में CMHO और PMO के खिलाफ कार्यवाही के लिए विभाग के स्तर पर मौजूद अधिकारियों से ही राज्य सरकार के पास अनुशंषा के लिए फाइल आए।
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