पाली के रोहट क्षेत्र के अरटिया गांव में गुरुवार सुबह श्मशान भूमि में पानी भरा होने पर बॉडी लेकर खड़े ग्रामीण।
पाली जिला मुख्यालय से चंद किलोमीटर की दूरी पर आबाद अरटिया गांव के श्मशान घाट में तालाब के ओवरफ्लो का पानी भरा होने के कारण करीब दो घंटे बॉडी सड़क पर रखनी पड़ी। फिर JCB बुलाकर कच्चा रास्ता बनाया और बॉडी रखने के लिए मिट्टी डलवाई। उसके बाद अंतिम संस्कार

जेसीबी से मिट्टी डालकर बनाया गया कच्चा रास्ता।

पानी में मिट्टी डालकर सुखी जगह बनाई फिर उस पर बॉडी रखकर ग्रामीणों ने किया अंतिम संस्कार।
दरअसल पाली जिले के रोहट क्षेत्र के अरटिया गांव के तालाब के पीछे की तरफ श्मशान घाट बना हुआ है। हर साल मानसून में तालाब ओवरफ्लो होने के कारण उसका पानी श्मशान भूमि में भर जाता है। गुरुवार सुबह अरटिया गांव निवासी 35 साल की भुंडी देवी बावरी की बॉडी अंतिम संस्कार को लेकर पहुंचे परिजन और समाज के लोगों को खासी परेशानी हुई। श्मशान भूमि में पानी भरा हुआ था। ऐसे में उन्होंने अपने स्तर पर JCB मंगवाई और श्मशान भूमि तक जाने के लिए कच्चा रास्ता बनाया। उसके बाद बॉडी रखने के लिए मिट्टी डलवाई। उसे पर बॉडी रखकर बाद में अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम संस्कार में पूर्व वार्ड पंच शिवाराम बावरी, शंकरलाल, भीमाराम, कानाराम, कालूराम, कानाराम, जेठाराम, नवाराम, दीपाराम, दुर्गाराम, मांगीलाल, मदनलाल, नेमाराम, गोपाराम, पोकरराम, मंगलाराम, हरजीराम, बुदाराम, भंवरलाल, कुपाराम, मेघाराम, अर्जुनराम सहित कई ग्रामीण शामिल रहे।
15 दिन से बीमार थी छह बच्चों की मां ग्रामीणों ने बताया कि अरटिया गांव निवासी 35 साल की भूंडी देवी पत्नी रमेश चौकीदार पिछले करीब 15 दिनों से बीमार थी। उसके छह बच्चे है। उसकी मौत होने पर गुरुवार सुबह करीब नौ बजे बॉडी अंतिम संस्कार को लेकर परिजन और समाज के लोग पहुंचे तो हालात विकट थे। अंतिम संस्कार के लिए उन्हें श्मशान घाट में सुखी जगह तक नहीं मिली। बाद में जेसीबी की सहायता से मिट्टी डाली गई। ग्रामीणों की मांग है कि श्मशान भूमि में तालाब के ओवरफ्लो होने से जो पानी आ रहा है। उसका रास्ता बदला जाए ताकि अंतिम संस्कार करने में दिक्कत न हो।
परिजन बोले – श्मशान भूमि में भरा पानी, सालों से परेशान मामले में मृतका के रिश्ते के देवर अरटिया गांव निवासी पूर्व वार्ड पंच शिवाराम बावरी ने बताया कि सालों से समस्या बनी हुई। बावरी समाज के श्मशान घाट में जाने के मुख्य रास्ते पर तीन-तीन फीट पानी भरा है। श्मशान घाट में भी पानी भरा था। बॉडी जलाने के लिए जगह तक नहीं थी। ऐसे में अपने स्तर पर जेसीबी मंगवाई। कच्चा रास्ता बनाया और श्मशान भूमि में बॉडी रखने के लिए मिट्टी डालकर जगह बनाई। उस पर बॉडी रखकर बाद में अंतिम संस्कार किया गया। यह समस्या पिछले करीब कई सालों से है। तालाब का पानी श्मशान भूमि में भरने से मानसून के दौरान किसी की मौत हो जाती है तो अंतिम संस्कार करने के लिए भी खासा परेशान होना पड़ता है।
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