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रामदेवरा से लौटते समय राजे शेरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में फलोदी रोड फांटा पर रुकीं। यहीं कार्यकर्ताओं से सवाल किया ‘बाबूसिंह राठौड़ जिंदाबाद, तो कहां है?’
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पिछले तीन दिन से मारवाड़ के दौरे पर है और यहां उनकी धार्मिक स्थलों की यात्रा के साथ लगातार दौरे-मुलाकातें सुर्खियों में है। इसी बीच, शेरगढ़ क्षेत्र में कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत करते समय वसुंधरा राजे जिंदाबाद के साथ बाबू
इसके जवाब में जब कार्यकर्ताओं ने बताया कि वो तो जयपुर हैं, तो राजे ने इतना ही कहा कि आज तो छुट्टी है। इसके बाद उनकी इस मुद्दे पर चुप्पी ने सबको चौंका दिया है, क्योंकि राजनीतिक गलियारे में उनकी चुप्पी के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि राजे के करीबी विधायक गैरहाजिर कैसे हैं। हालांकि, राठौड़ के नजदीकी कार्यकर्ताओं का कहना है कि विधानसभा चल रही है और इस बीच सिर्फ एक दिन की ही छुट्टी थी, इसी वजह से वे जयपुर ही रुके रहे।
कुछ यूं चला शेरगढ़ के इस वीडियो से जुड़ा घटनाक्रम
दरअसल, मंगलवार को पूर्व सीएम राजे मोहनगढ़, पोकरण व रामदेवरा दर्शन करने पहुंची थीं। वहां से वापस लौटते समय रात हो गई, लेकिन शेरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में फलोदी रोड फांटा पर कई कार्यकर्ता उनके स्वागत के लिए खड़े थे। राजे वहां पहुंची तो कार्यकर्ताओं ने जोश के साथ ‘वसुंधरा राजे जिंदाबाद’ के साथ ‘बाबूसिंह राठौड़ जिंदाबाद’ के नारे लगाने लगे।
कुछ देर तक नारे लगते रहे, तब राजे मुस्कुराते हुए बोलीं – ‘एक मिनट रुको…’ ‘बाबूसिंह जिंदाबाद…तो कहां है?’ जवाब मिला कि ‘जयपुर हैं।’ तब वे बोलीं – आज तो छुट्टी है?। इसके बाद वे कार से उतरीं और शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया। तत्पश्चात कार्यकर्ताओं ने उनका माल्यार्पण किया और पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।
ज्ञापन पर बोलीं राजे: …तो सीएम साहब को बोलो
यहां राजे ने देर रात तक कार्यकर्ताओं के रुकने के लिए धन्यवाद भी दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने फिर से राजे और राठौड़ जिंदाबाद के नारे लगाए और राजे वहां से रवाना होने लगी, तो एक कार्यकर्ता ने उन्हें देवनारायण बोर्ड की तर्ज पर एक अन्य बोर्ड को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित मांग का ज्ञापन सौंपा, तो राजे ने फिर चुटकी लेते हुए कहा कि सीएम साहब को बोलो। तब भी कार्यकर्ताओं ने उनसे यही कहा कि हमारे सीएम तो आप ही हो।
इशारों में गहरे राजनीतिक संकेत
वसुंधरा राजे के लगातार तीसरे दिन जोधपुर में होने, संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलने, पार्टी में एकजुट रहने की बात करने, स्थानीय स्तर पर नजदीकी कार्यकर्ताओं से मिलने के साथ-साथ अलग-अलग मौकों पर किसी न किसी बहाने कुछ संदेश देना काफी कुछ इशारे कर रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा यही है कि बाबूसिंह जिंदाबाद कहां है? सीएम साहब को बोलो जैसी बातों-सवालों में भी गहरे राजनीतिक संकेत छुपाए हुए हैं।
कयास कुछ इस तरह के
1. नेतृत्व की परीक्षा: वसुंधरा राजे की चुटकी में छुपे कटाक्ष उनके समर्थकों के लिए एक संदेश हो सकता है कि वे अपनी वफादारी को लेकर स्पष्ट रुख अपनाएं।
2. पार्टी एकता की चुनौती: भाजपा के भीतर विभिन्न गुटों के बीच समन्वय की कमी का यह एक उदाहरण तो नहीं?
3. भविष्य की रणनीति: आने वाले समय में राजे के राजनीतिक फैसलों का इन टिप्पणियों से कोई आधार बनने क संकेत तो नहीं?
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