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बूंदी के कापरेन में 46 लाख के दो तिरंगे झंडे डेढ़ साल से गायब।
बूंदी के कापरेन में डेढ़ साल पहले 46 लाख रुपए की लागत से दो तिरंगे झंडे लगाए जाने थे। नगरपालिका ने इसका ट्रायल भी किया था, लेकिन पक्ष-विपक्ष के अधिकांश पार्षदों और आमजनों के विरोध के कारण पालिका प्रशासन ने दोनों झंडे वापस उतार दिए।
गौरतलब यह है कि झंडे पास न होने के बावजूद भी संवेदक को आधे से ज्यादा राशि का भुगतान कर दिया गया। अब तक कोई झंडा नहीं लगाया गया है। जानकारों के अनुसार, कोटा उम्मेद भवन के पास लगा झंडा महज 14 लाख रुपए की लागत से लगाया गया था।
यहां कापरेन में उससे महंगे और घटिया झंडे प्रति 23 लाख रुपए की लागत से लगाए जाने थे। यह मामला लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। शुरुआत में पालिका बोर्ड में विपक्ष सहित अन्य पार्षदों ने इसका कड़ा विरोध किया था।
अब डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी बोर्ड के सभी सदस्य इस मामले पर मौन हैं। स्थानीय लोगों में भ्रष्टाचार की आशंका है। इन डेढ़ वर्षों में कई बार पालिका चेयरमैन हेमराज मेघवाल से लोगों ने शिकायत की और कारण जानना चाहा।
लेकिन उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। यह मामला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने भी भाजपा नेताओं और पार्षदों द्वारा उठाया गया था। कस्बे में भ्रष्टाचार की आशंका के चलते यह मामला अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
वाइस चेयरमैन व भाजपा शहर मंडल अध्यक्ष हेमंत पंचोली ने कहा:- उन दिनों नगर पालिका प्रशासन ने झंडे लगाए थे और दो दिन बाद ही वापस हटा दिए थे,आगे क्या हुआ ये मेरी जानकारी में नहीं हैं। नगर पालिका कापरेन, जेईएन भूपेंद्र सिंह हाड़ा का कहना है:- अभी तो में नया आया हूं, इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। फिर भी मामले को गंभीरता से लेकर बात करेंगे। नगर पालिका कापरेन, लिपिक लोकेश गौतम का कहना है:- संवेदक ने पूरा कार्य नहीं किया था, झंडे लगाए तो पार्षदों व आमजनों के विरोध के बाद झंडे हटा दिए गए थे। भुगतान भी आधा ही किया गया है। कार्य पूरा करने के बाद झंडे लगाए जाएंगे उसके बाद ही शेष भुगतान किया जाएगा। ईओ नगर पालिका कापरेन, प्रवीण कुमार शर्मा ने बताया:- पहले में यहां था तो झंडे लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी और मेरे ट्रांसफर के बाद फिर क्या हुआ वो मेरी जानकारी में नहीं हैं। जानकारी लेकर बता पाऊंगा। पूर्व पालिका चेयरमैन व वरिष्ठ भालप नेता राजेंद्र कुमार पाटनी का कहना है:- ये समस्या या फिर लापरवाही जो भी है जग जाहिर है,ऐसे ग्रामीण वार्ड जिनकी बैसाखियों के सहारे नगर पालिका का गठन हुआ था वे आज भी नगरीय सुविधाओं से अछूते हैं ऐसे में जनता के पैसों का अनावश्यक दुरुपयोग या बंदरबांट होना नहीं चाहिए। कंटेंट- प्रमोद सिसोदिया
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