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उत्तर भारत की सबसे बड़ी हिंदी साहित्य समिति में रखी कई वर्षों पुरानी पांडुलिपियों का संरक्षण शुरू हो गया। आने वाले समय में जल्द ही दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलाइजेशन आरंभ कर दिया जाएगा। जिसके लिए भाषा एवं पुस्तक विभाग ने इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर

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4 अगस्त से हिंदी साहित्य समिति में रखीं 1500 पांडुलिपियों के एक-एक पन्ने का केमिकल क्लीन कर जापानी टिशू पेपर व नेपाली पेपर का इस्तेमाल कर संरक्षण का काम किया जा रहा है, जिससे इन दुर्लभ पांडुलिपियों का उपयोग रिसर्च में किया जा सकेगा।

113 वर्ष पुरानी ज्ञान की भंडार हिंदी साहित्य समिति में 450 वर्ष से भी पुरानी बेशकीमती 1500 पांडुलिपियां व साहित्य की किताबों को संरक्षित करने की मांग कई सालों से साहित्य प्रेमियों द्वारा उठाई जा रही थी। इसी को देखते हुए पिछले साल से ही समिति में रखी पांडुलिपियों व किताबों के डिजिटलाइजेशन को लेकर काम चल रहा था।

भाषा एवं पुस्तकालय विभाग के सहायक प्रशासनिक धर्मेंद्र सिंह बताते हैं कि समिति के वजूद को बरकरार रखने के लिए यह काम शुरू किया गया है। दो से ढाई साल में सभी दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलाइजेशन का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद आसानी से कोई भी पांडुलिपियों को पढ़ सकेंगा।

भाषा एवं पुस्तक विभाग ने इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स से किया एमओयू

दान की 5 किताबों से शुरू हुई थी समिति

24000 से अधिक किताबें हिंदी साहित्य समिति की स्थापना हिंदी भाषा व देवनागरी लिपि के उन्नयन, हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं विकास के लिए की गई थी। समिति की स्थापना 13 अगस्त 1912 में पूर्व राजमाता माजी गिर्राजकौर की प्रेरणा से अधिकारी जगन्नाथ के नेतृत्व में की गई थी। शुरुआत में समिति में घर-घर जाकर पुस्तकें इकट्ठा की गई थी।

अब एक क्लिक पर मिलेंगी समिति की किताबें

साहित्य समिति में रखीं 24000 किताबों को समिति के कंप्यूटर पर चढ़ाया जा रहा है, इससे एक क्लिक पर पाठकों के लिए आसानी से किताबें उपलब्ध हो सकें। इसके लिए जून 2025 से ही कार्य आरंभ कर दिया गया है। समिति में 44 विषयों में हजारों किताबें रखी हुई हैं।

“डिजिटल वाटर व केमिकल से पांडुलिपियों को क्लीन करा जाता है। उसके बाद जापानी टिशू पेपर 3 जीएसएम पेपर व नेपाली पेपर का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यह पेपर एसिड फ्री पेपर होता है। इससे कागज पीला नहीं पड़ता और न जल्दी कागज गलता है। आम कागज में एसिड होता है। जैसे-जैसे साल बीतते जाते हैं कागज एसिड के कारण गल जाता है। इस कारण इस कागज का उपयोग कर रहे हैं। इसके बाद फोल्डर बना अर्काइवल बॉक्स में इनको रखा जाएगा। फिर स्कैनर से स्कैन करेंगे और पीडीएफ बना देंगे। -सुहैल, टीम मेंबर, आईजीएनसीए



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