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प्रतापगढ़ जिले में बंधुआ मजदूरी जुड़े मामले में कार्रवाई की गई है। उदयपुर जिले के जनजातीय समुदाय के तीन बच्चों को गडरियों से मुक्त कराया गया है। गायत्री सेवा संस्थान प्रतापगढ़ की पहल पर जिला प्रशासन ने बच्चों को बंधुआ मुक्ति प्रमाण पत्र दिए हैं।
देवगढ़ थाना क्षेत्र में तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। अतिरिक्त जिला कलेक्टर विजेश पंड्या ने बंधुआ श्रम उन्मूलन अधिनियम, 1976 की धारा 6 के तहत बच्चों को प्रमाण पत्र दिए। प्रत्येक बच्चे को तत्काल 30 हजार रुपए की अंतरिम सहायता मिलेगी। पुनर्वास योजनाओं के तहत आगे 3 लाख रुपए तक की मदद दी जाएगी।
बाल अधिकार विशेषज्ञ डॉ. शैलेन्द्र पण्ड्या के अनुसार, यह प्रमाण पत्र बच्चों के लिए कानूनी सुरक्षा कवच है। अब उन पर कोई बकाया ऋण या दावा मान्य नहीं होगा। यह प्रमाण पत्र सरकारी पुनर्वास योजनाओं का आधार बनेगा।
गायत्री सेवा संस्थान के जिला समन्वयक रामचन्द्र मेघवाल ने बताया कि बाल कल्याण समिति के सहयोग से बच्चों को राजकीय बालगृह से कलेक्टर कार्यालय लाया गया। श्रम अधिकारी गोपाल मीणा और अधिवक्ता मंजूर खान ने दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की।
संस्थान अब बच्चों के बैंक खाते खुलवाने और पुनर्वास की कार्रवाई करेगा। इस कार्यवाही में श्रम विभाग, गायत्री सेवा अतिंम बाल पूजा राजपूत संस्थान चित्तौड़गढ़ और चाइल्ड लाइन टीम का विशेष योगदान रहा।
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