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चित्तौड़गढ़ में अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-2 के पीठासीन अधिकारी विनोद कुमार बैरवा ने सात साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में तीन आरोपियों को पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने तीनों दोषियों पर 85 से 85 हजार रुपए तक का जुर्

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पुरानी रंजिश को लेकर हुआ था हमला

अपर लोक अभियोजक ममता जीनगर ने जानकारी दी कि यह मामला चित्तौड़गढ़ के चंदेरिया थाना क्षेत्र का है। घटना जून 2018 की है, जब पीड़ित जगदीश चंद्र ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि वह अपने बेटे दिनेश के साथ मोटरसाइकिल का टायर-ट्यूब बदलवाने के लिए निंबाहेड़ा रोड स्थित नंदराम प्रजापत की दुकान पर गए थे। इसी दौरान, पुरानी रंजिश के चलते अचानक वहां कुछ लोग पहुंचे। रिपोर्ट के अनुसार, गौरीलाल पुत्र मेघराज गुर्जर, लक्ष्मण गुर्जर, प्रभुलाल पुत्र मेघराज गुर्जर, कैलाश पुत्र मेघराज गुर्जर, राजू गुर्जर, कमलेश गोस्वामी, शंकर लाल सालवी और गणपत गुर्जर मोटरसाइकिल पर सवार होकर वहां आए।

आरोपियों ने पिता-पुत्र पर किया जानलेवा हमला

जगदीश के अनुसार, इनमें से गौरीलाल और राजू गुर्जर ने उन पर और उनके बेटे दिनेश पर तलवार से जानलेवा हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले में दोनों बुरी तरह घायल हो गए। इसके बाद अन्य आरोपियों ने भी मारपीट की और मौके से फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही चंदेरिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को हॉस्पिटल भिजवाया। मामला दर्ज कर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया और जांच के बाद चालान न्यायालय में पेश किया।

एक आरोपी की हुई मौत, फाइल बंद

जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आरोपियों में से कैलाश गुर्जर, लक्ष्मण गुर्जर, प्रभुलाल, राजू गुर्जर, कमलेश गोस्वामी, और गणपत गुर्जर का इस घटना में कोई प्रत्यक्ष रोल नहीं था। वहीं, गौरीलाल गुर्जर, नारायण गुर्जर, शंकरलाल सालवी और रतनलाल गुर्जर के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले, जिन पर मुकदमा आगे बढ़ाया गया।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 25 डॉक्यूमेंट्स और 20 गवाहों के बयान पेश किए। इसी बीच आरोपी नारायण गुर्जर की मौत हो गई, जिसके बाद उनके खिलाफ की गई कार्रवाई बंद कर दी गई। शेष तीन आरोपियों गौरीलाल गुर्जर, शंकरलाल सालवी और रतनलाल गुर्जर को न्यायालय ने दोषी पाया।

85-85 हजार रुपए का लगाया जुर्माना

सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद पीठासीन अधिकारी विनोद कुमार बैरवा ने तीनों दोषियों को पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने प्रत्येक पर 85 हजार से 85 हजार रुपए तक का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए यह सजा उचित है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके। इस फैसले के साथ सात साल पुराने इस मामला का निपटारा हुआ, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिला।



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