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प्रदेश में भारी बारिश के चलते फसलों एवं आम जन को हुए नुुकसान को लेकर विपक्षी सदस्यों ने गुरुवार को विधानसभा में जमकर हंगामा किया। हंगामे के बीच ही सदन में तीन महत्वपूर्ण बिल महज 15 मिनट में पास कर दिए गए। इसमें सिर्फ दो सदस्यों ने चर्चा में हिस्सा लि

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इसके लिए उनकी लिखित सहमति आवश्यक की गई है। इससे महिला श्रम की भागीदारी बढ़ेगी और महिला सशक्तीकरण का मार्ग प्रशस्त होगा। वहीं, श्रमिक प्रतिदिन कारखानों में 10ः30 घंटे तक उपस्थित रह सकेंगे। इन सब से औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। उधर, विधानसभा अध्यक्ष ने बिल पारित होते ही सदन की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। शुक्रवार से रविवार तक अवकाश रहेगा।

बिना बहस के बिल पारित

सदन की कार्यवाही भोजन अवकाश के बाद दोपहर दो बजे जैसे ही शुरू हुई कांग्रेसी सदस्यों ने वेल में आकर हंगामा शुरू कर दिया। इस बीच उपमुख्यमंत्री दियाकुमारी ने राजस्थान विनियोग (संख्या 3) विधेयक-2025 सदन में पेश किया। सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया। यह विधेयक वित्तीय वर्ष 2025 26 की सेवाओं के लिए राज्य की समेकित निधि में से कतिपय और राशियों के संदाय और विनियोजन को प्राधिकृत करने के लिए लाया गया है।

सिर्फ एक विधायक ने चर्चा में भाग लिया, बिल पास

राजस्थान माल और सेवा कर (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 को सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह ने विधेयक को सदन में विचारार्थ प्रस्तुत किया। इस बीच सदन में हंगामा चल रहा था। विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा के लिए तय नाम भी पुकारे, लेकिन विपक्षी सदस्यों में से किसी ने चर्चा में हिस्सा नहीं लिया।

महिलाओं की कार्यक्षेत्र में भागीदारी बढ़ेगी

कारखाना (राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2025 ध्वनिमत से गुरुवार को विधानसभा में पारित कर दिया गया। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने सदन में कहा कि कारखाना अधिनियम, 1948 में किए गए संशोधन से श्रमिक लाभान्वित होंगे। विधेयक के प्रावधानों से महिलाओं की कार्यक्षेत्र में भागीदारी बढ़ेगी, निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, वृहत स्तर पर रोजगार सृजित होंगे और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। कारखानों में सप्ताह में अधिकतम काम करने की अवधि को बढ़ाया गया है। जिससे उत्पादन और उत्पादकता बढ़ेगी। राज्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

विधेयक से बिना अंतराल के श्रम के प्रावधान को लचीला बनाया गया है ताकि श्रमिक इस बचे हुए समय को अपने घर-परिवार को दे सकेंगे। साथ ही, अब मजदूर बिना अंतराल के 6 घंटे तक कारखाने में काम कर सकेंगे। श्रमिक प्रतिदिन कारखानों में 10ः30 घंटे तक उपस्थित रह सकेंगे। श्रमिक 75 घंटे के स्थान पर 144 घंटे प्रति तिमाही ओवरटाइम कर सकेंगे। इससे श्रमिक को कई फायदे मिलेंगे। इससे प्रदेश में बाहर से आए श्रमिकों को भी लाभ मिलेगा।खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने कहा कि अब महिलाएं स्वयं की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए रात्रि में भी कार्य कर सकेंगी।



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