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दो दशक पहले तक राजस्थान के गांव–गांव में बड़ी संख्या में लोग हैंडलूम व्यवसाय से जुड़े थे। मगर अब हाथों से कपड़े और इसके उत्पाद बनाने वाले लोगों की संख्या में बड़ी गिरावट आ गई है। अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना के अनुसार देश में 35 लाख बुनकर और इस व्यवसाय से ज
यहां हथकरघा बुनकर और इससे संबद्ध श्रमिकों की संख्या 10 हजार ही है। यही नहीं, राजस्थान के 41 जिलों में से अब केवल 16 जिलों में ही हथकरघा बुनकर रह गए हैं। इन 16 जिलों में से भी कई जिलों में बहुत ही कम संख्या में बुनकर–श्रमिक रह गए हैं। राष्ट्रीय परिदृश्य के अनुपात में 0.286 प्रतिशत ही है। टेक्सटाइल इंडस्ट्री के आधुनिकीकरण के दौर में बुनकर मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। अधिकांश बुनकर उम्रदराज हो गए हैं जबकि नई पीढ़ी का इस ओर रुझान आशानुरूप नहीं है।
वस्त्र मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में कोटा, बूंदी में हैंडलूम से सर्वाधिक लोग जुड़े हुए हैं। यहां कैथून, मांगरोल व बूंदी के करीब पांच बुनकर कोटा डोरिया साड़ी बना रहे हैं। इनके बाद जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, जालोर आदि जिलों में है। इन जिलों में करीब 1500 बुनकर–श्रमिक हैं, यहां सर्वाधिक पट्टू, साड़ी व दरी उद्योग है। जबकि बीकानेर, नागौर, सीकर, फलोदी आदि जिलों में इनकी संख्या नाम मात्र ही है।
यहां करीब 500 बुनकर खेस, तोलिया, पट्टू और चद्दर का उत्पादन कर रहे हैं। इनके अलावा दौसा, अजमेर, ब्यावर, चूरू, झालवाड़ और जयपुर जिले के बुनकर दरी, खेस, तोलिया, चद्दर बना रहे हैं। इन जिलों में तीन हजार बुनकर–श्रमिक पंजीकृत है। इनकी आमदनी बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम और कच्चा माल आपूर्ति योजना संचालित की जा रही है। उन्हें उपकरण, डिजाइन, प्रशिक्षण और देसी–विदेशी बाजार उपलब्ध करवाने में मदद दी जा रही है।
बुनकरों को मुद्रा योजना के अंतर्गत रियायती ऋण और सामाजिक सुरक्षा इत्यादि के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। कच्चा माल आपूर्ति योजना के अंतर्गत धागा मंगवाने में 15 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। पहचान के लिए ई–पहचान कोर्ड का ऑनलाइन पॉर्टल शुरू किया गया है। इसी पहचान के आधार पर विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया जा सकता है।
असम अव्वल, 6 राज्य ही राजस्थान से पीछे
देश में सर्वाधिक 12.83 लाख बुनकर अकेले असम राज्य में है। इसके बाद 6.3 लाख बुनकर पश्चिम बंगाल में है। जबकि अन्य सात राज्यों में एक से छह लाख बुनकर हैं। जबकि राजस्थान से पिछे सिर्फ छह राज्य है। जिनमें सिक्किम में 697 बुनकर, पंजाब में 969, पुद्दुचेरी में 1690, महाराष्ट्र में 3509, दिल्ली में 4285 और गोवा में सिर्फ 26 बुनकर पंजीकृत है।
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