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बीकानेर रेलवे स्टेशन पर लगी पूर्व विधायक मुरलीधर व्यास की मूर्ति को हटाया जा रहा है। सोमवार को कुछ लोगों ने मूर्ति स्थल पर पहुंचकर उसके एक तरफ के बोल्ट खोल दिए। जेसीबी से लोहे की चेन प्रतिमा के गले में भी डाल दी। यह देख व्यास के परिजन को सूचना दी गई।
इसे लेकर विरोध बढ़ना शुरू हो गया। मामले में रेल अधिकारियों से बातचीत की तो उनका कहना था कि मूर्ति हटाने की परमिशन हमने नहीं दी है।
स्टेशन का करवाया जा रहा है रेनोवेशन, गले में चेन डाली मूर्ति हटाई
दरअसल, बीकानेर रेलवे स्टेशन का 500 करोड़ से ज्यादा की लागत से रेनोवेशन करवाया जा रहा है। मुरलीधर व्यास की ये प्रतिमा रेलवे स्टेशन के ठीक सामने 54 साल पहले 1971 में लगाई गई थी।
बताया जा रहा है कि स्टेशन के रेनोवेशन के लिए कंपनी ने मुरलीधर व्यास की इस प्रतिमा को हटाया है। सोमवार दोपहर 12 बजे 4-5 लोगों की टीम जेसीबी के साथ रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार पर पहुंची। मुरलीधर व्यास की मूर्ति के गले में चेन डाली। कुछ मजदूरों ने मूर्ति के नीचे लगे नट-बोल्ट खोलने शुरू कर दिए। मूर्ति के नीचे लगे स्ट्रक्चर को तोड़ा गया।
सूचना मिलने के बाद व्यास परिवार के लोग मौके पर पहुंचे। समर्थकों की भीड़ भी जुटी। मूर्ति हटाने का विरोध शुरू हो गया। विरोध को देखते हुए काम करने वाले वहां से चले गए। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि मूर्ति हटाने का वर्क ऑर्डर नहीं है।
माना जा रहा है कि रेलवे स्टेशन के नवीनीकरण काम को देखते हुए मूर्ति को अन्यत्र शिफ्ट करने की कोशिश की जा रही थी। इससे पहले परिजन-प्रशासन को सूचना नहीं दी गई। इसी कारण रेलवे अधिकारी जिम्मेदारी लेने से बचते रहे। इस मामले में रेलवे डीआरएम से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो सकी।
दो बार विधायक रहे थे व्यास
बीकानेर में वर्ष 1957 से 1967 तक मुरलीधर व्यास बीकानेर के 2 बार विधायक रहे। समाजवादी नेता रहे नारायण दास रंगा ने बताया- मूर्ति को लगाने के लिए बाबू जयप्रकाश नारायण जैसे नेता बीकानेर आए थे। मुरलीधर व्यास के नाम से बीकानेर में एक कॉलोनी भी विकसित हुई।
उन्हें जन नेता का दर्जा मिला। विकास के लिए अगर मूर्ति को हटाना है तो इसे रेलवे अपने अधिकार क्षेत्र में ले और वापस यहीं पर लगाने का काम करे।
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