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रवींद्र मंच के मिनी थिएटर में रंग सारथी की प्रस्तुति ‘बिंब-प्रतिबिंब’ का मंचन हुआ

रवींद्र मंच के मिनी थिएटर में रंग सारथी की प्रस्तुति ‘बिंब-प्रतिबिंब’ का मंचन हुआ, जिसने दर्शकों को मृत्यु के बाद की काल्पनिक दुनिया में ले जाकर जीवन के भेदभाव, अन्याय और मानवीय मूल्यों पर सवाल खड़े कर दिए।

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लतीफ उस्ता की ओर से लिखित और प्रदेश के वरिष्ठ अभिनेता एवं नाट्य निर्देशक महमूद अली के निर्देशन में प्रस्तुत यह नाटक यथार्थ और कल्पना के बीच झूलती कहानी है, जिसमें मृत्यु के बाद आत्माएं अपने जीवन के कर्मों का हिसाब ईश्वर की अदालत में देती हैं। जहां न जाति-धर्म का भेद है, न अमीरी-गरीबी, केवल कर्मों का लेखा-जोखा।

लतीफ उस्ता की ओर से लिखित और प्रदेश के वरिष्ठ अभिनेता एवं नाट्य निर्देशक महमूद अली के निर्देशन में प्रस्तुत यह नाटक यथार्थ और कल्पना के बीच झूलती कहानी है।

लतीफ उस्ता की ओर से लिखित और प्रदेश के वरिष्ठ अभिनेता एवं नाट्य निर्देशक महमूद अली के निर्देशन में प्रस्तुत यह नाटक यथार्थ और कल्पना के बीच झूलती कहानी है।

नाटक में नर, नारी और ट्रांसजेंडर पात्रों के साथ 127, मोसु, अमृता प्रीतम और ओशो जैसे प्रतीकात्मक किरदारों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जीवन में किए गए कर्म ही अंतिम दुनिया में सच को सामने लाते हैं। मंच पर भेदभाव और उपेक्षा झेल चुके ये पात्र मृत्यु के बाद भी अपने सच को समाज के सामने रखने का प्रयास करते हैं।

निर्देशक महमूद अली ने कहा कि अगर मृत्यु के बाद सब बराबर है, तो जीवन में ये भेदभाव क्यों? यही सवाल इस नाटक का मूल है।

निर्देशक महमूद अली ने कहा कि अगर मृत्यु के बाद सब बराबर है, तो जीवन में ये भेदभाव क्यों? यही सवाल इस नाटक का मूल है।

निर्देशक महमूद अली ने कहा कि अगर मृत्यु के बाद सब बराबर है, तो जीवन में ये भेदभाव क्यों? यही सवाल इस नाटक का मूल है। उन्होंने इसे मानव आत्मा के अंतर्मन संघर्ष का आईना बताया और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करने का प्रयास किया।

मंच पर अतुलेश कुमार कुलश्रेष्ठ (न्यायाधीश), राहुल यादव (नर), भानुप्रिया सैनी (नारी), जीनू थॉमस मैथ्यूज (127), नेहा बुटोलिया (मोसू), मधु देवासी (अमृता प्रीतम), अरशद उल इस्लाम (ओशो), हसीब खान (ट्रांसजेंडर), अंकित गांधी (अनामी) और गुरु प्रसाद कुमावत (सृष्टि की रचना) ने दमदार अभिनय से कहानी को जीवंत किया।

प्रकाश परिकल्पना गगन मिश्रा, संगीत परिकल्पना हिमांशु वर्मा और गुरु प्रसाद कुमावत, सेट डिजाइन भानुप्रिया सैनी, कॉस्ट्यूम मधु देवासी और मेकअप नेहा बुटोलिया ने किया।

रंग सारथी संस्था ने इस नाटक के जरिए लोक नाट्य शैली और आधुनिक रंगमंच को जोड़ते हुए सामाजिक चेतना का संदेश देने का प्रयास किया। संस्था विशेष योग्यजन के साथ भी सक्रिय रूप से काम कर रही है ताकि रंगमंच सबके लिए अभिव्यक्ति का मंच बन सके।



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