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पांच दिन बाद 1 सितंबर से 16वीं विधानसभा का 1 सितंबर से चतुर्थ सत्र शुरू हो रहा है। विधानसभा सत्र के दौरान सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नकाल होता है। इसमें विधायकों के सवालों के जवाब मंत्री को देने होते हैं। लेकिन राजस्थान विधानसभा का हाल यह है कि जितने तारां
3 सत्रों में 102 विधायकों द्वारा 11 हजार से अधिक तारांकित सवाल पूछे गए लेकिन 860 के ही जवाब सदन में मंत्रियों ने दिए। इसके बावजूद सदन द्वारा कहा जाता है कि 94 प्रतिशत सवालों के जवाब आ गए हैं। हकीकत कुछ और है। 90 प्रतिशत सवाल विधायकों द्वारा अपने क्षेत्र की जनता के अलावा दूसरे इलाकों या मुद्दों से जुड़े पूछे जाते हैं। उनके जवाब भी समय पर दिए नहीं जाते या गोलमोल तैयार कर डाक से भिजवा दिए जाते हैं। सिर्फ 6 प्रतिशत सवालों के जवाब सदन में दिए जाते हैं, उनमें भी सरकार को घेरने या मंत्री की कसरत करवाने वाले सवाल सिर्फ 1 प्रतिशत ही होते हैं।
अगला सत्र: 1183 सवाल लगे, घेरने वाले सिर्फ 9
विधानसभा के चतुर्थ सत्र के लिए अभी तक विधायकों की तरफ से 1183 सवाल लगाए गए हैं। उनमें से 1 प्रतिशत से भी कम यानी 9 सवाल ही ऐसे हैं जिनमें विपक्ष मंत्री या सरकार को घेर सकता है। अन्य सभी सवाल लोकल छिटपुट समस्याओं से जुड़े हैं।
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