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टोंक जिले में लांबाहरिसिंह कस्बे में किले (गढ़) की सुरक्षा दीवार स्कूल बिल्डिंग पर गिर गई। यह हादसा शनिवार की सुबह हुई। इससे स्कूल के 4 कमरे जमींदोज हो गए। इस दौरान लोगों ने 3 बार तेज धमाकों की आवाज सुनी।

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लांबाहरिसिंह की सीनियर सेकेंडरी स्कूल भवन के पीछे करीब 100 मीटर लंबी 425 साल पुरानी किले (गढ़) की सुरक्षा दीवार भरभरा कर स्कूल भवन के कमरों पर गिर गई। इससे 4 बड़े हॉल जमींदोज हो गए।

सुबह साढ़े 5 से 6 बजे के बीच हुआ हादसा वही इनके पास 4 ऐसे ही बड़े कमरे भी पीछे की ओर से डैमेज हो गए। यह हादसा शनिवार सुबह साढ़े 5 बजे से 6 बजे के बीच हुआ। किले के पीछे की ओर रहने वाले लोगों कहना है कि 3 बार तेज धमाके की आवाज आई थी।

स्टाफ पहुंचा स्कूल तो चला पता गनिमत यह रही कि उस समय स्कूल भवन में कोई नही था, यह घटना स्कूल समय में होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। इसका पता स्कूल स्टाफ को तो शनिवार सुबह करीब 7 बजे स्कूल पहुंचने पर चला। उसके बाद बच्चों की स्कूल आते ही छुट्टी कर दी गई। उधर इस घटना का पता लगने के बाद मौके पर मालपुरा तहसीलदार, जेईएन हनुमान प्रजापत आदि अधिकारी मौके पर पहुंचे। ये कमरे करीब 21 साल पहले 2 चरणों में बने थे।

घटना स्थल के पास उसी परिसर में कक्षा 6 से 8 तक के स्कूल भवन के सामने खड़े बच्चे और ग्रामीण। यह भवन भी काफी पुराना है।

घटना स्थल के पास उसी परिसर में कक्षा 6 से 8 तक के स्कूल भवन के सामने खड़े बच्चे और ग्रामीण। यह भवन भी काफी पुराना है।

‘4 अन्य कमरों को भी ढहाना पड़ेगा’ जेईएन हनुमान प्रजापत ने बताया कि किले की सुरक्षा दीवार स्कूल भवन पर गिर पड़ी। इससे चार कमरे तो जमींदोज हो गए। उनके पास के 4 अन्य कमरे भी पीछे की ओर से डैमेज हो गए। उनमे भी अब बच्चे नहीं बिठा सकते है। उन्हे भी अब ढहाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

किले की दीवार करीब 20-25 मीटर ऊंची थी। क्षेत्र में गत दिनों से रोजाना हो रहे बारिश से दीवार करीब 100 मीटर की लंबाई की सुरक्षा दीवार ढह गई। लोगों का कहना है कि इस स्कूल परिसर से बरसाती पानी की निकासी नहीं है। बारिश का पानी परिसर में ही धीरे धीरे जमीन के अंदर जाता है। इससे भी बारिश के दिनों में स्कूल भवन में खतरा बना रहता है।

स्कूल के जो 4 कमरें जमींदोज हुए, उनमें कक्षा 11 और 12 के करीब 225 विद्यार्थी पढ़ते थे।

स्कूल के जो 4 कमरें जमींदोज हुए, उनमें कक्षा 11 और 12 के करीब 225 विद्यार्थी पढ़ते थे।

कक्षा 9 से 12वीं तक के स्टूडेंट्स बैठते थे इन चारों जमींदोज हुए कमरों में 11वीं और 12वीं की कक्षा के बच्चे बैठते थे। इनके पास वाले डैमेज हुए 4 अन्य कमरों में कक्षा 9 व 10 के बच्चे बैठते थे। इन चारों कक्षा में करीब 425 बच्चों का नामांकन है। वहीं कक्षा 6, 7, 8 के बच्चे इस किले के परिसर में ही राजा महाराजाओं के समय की करीब सवा चार सौ साला पुरानी बिल्डिंग में पढ़ते है।

इनपुट: संजय पाराशर, लांबाहरिसिंह।



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